Jamui Minor Girl Case: बिहार के जमुई में नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले के बाद उसकी और उसके परिवार की तस्वीर (Jamui Minor Girl Photo) सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर अब कार्रवाई हुई है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में तैनात आशुलिपिक यानी स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ पटना के सचिवालय थाने में एफआईआर दर्ज की गई है।
वहीं, पुलिस के पास दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पीड़िता और उसके परिजनों की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई, जिससे नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने का खतरा पैदा हुआ। ऐसे में आइए यहां पढ़ें पूरी खबर
क्या है पूरा मामला?
आपकी जानकारी के लिए बता दें 19 सितंबर को बिहार के जमुई जिले में एक नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया था। जिसमें घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आया और पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
वहीं, मामले के बाद पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने वाले वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर भी पुलिस की ओर से कार्रवाई की बात कही गई थी। नाबालिग पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा को लेकर कानून में विशेष प्रावधान हैं। इसी बीच पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने का मामला सामने आया।
CMO के स्टेनो पर क्या आरोप है?
सचिवालय थाने में दी गई शिकायत के अनुसार, 25 सितंबर को जानकारी मिली कि जमुई मामले की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की गई है। शिकायत में कहा गया है कि यह तस्वीर बाद में दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी शेयर हुई।
पुलिस के सामने की गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि जांच के दौरान तस्वीर पोस्ट किए जाने का संबंध मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात आशुलिपिक सागर प्रसाद से सामने आया। इसके बाद उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया गया।
शिकायत में तस्वीर को आगे प्रसारित करने वाले अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस अब मामले में पोस्ट और उसके प्रसार से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।

किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
दर्ज एफआईआर के मुताबिक, सचिवालय थाने में केस नंबर 200/26 दर्ज किया गया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धारा के साथ POCSO Act की धारा 23 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(E) और 67 का उल्लेख किया गया है।
POCSO कानून में नाबालिग पीड़ित की पहचान को सार्वजनिक करने से जुड़े प्रावधान हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान, तस्वीर या ऐसी जानकारी सार्वजनिक करना कानूनी कार्रवाई का विषय बन सकता है। हालांकि इस मामले में दर्ज आरोपों और धाराओं के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मुख्यमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल से भी हुई थी तस्वीर पोस्ट
इस मामले में उस समय विवाद और बढ़ गया था जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी पीड़िता और उसके परिवार के साथ तस्वीर साझा की गई थी। मुख्यमंत्री ने जमुई मामले की पीड़िता और उसके परिजनों से मुलाकात की थी।
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री की ओर से परिवार को न्याय दिलाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीर सामने आई। बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया।
तस्वीर सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और सांसद मीसा भारती ने पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने को लेकर आपत्ति जताई।
तेजस्वी यादव और मीसा भारती ने उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा किए जाने से नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर हुई और यह POCSO कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्होंने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री और सरकार पर सवाल उठाए।
वहीं, मीसा भारती ने भी बिहार पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर सागर प्रसाद के खिलाफ सचिवालय थाने में मामला दर्ज किया गया है।
अब पुलिस की जांच पर नजर
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की जिम्मेदारी है कि तस्वीर किस माध्यम से पोस्ट की गई, उसे किसने साझा किया और कितने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका प्रसार हुआ। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी।
जमुई मामले में पहले से चल रही जांच के बीच पीड़िता की तस्वीर साझा किए जाने का यह मामला अलग कानूनी कार्रवाई का विषय बन गया है। नाबालिग पीड़ित की पहचान की सुरक्षा इस मामले का अहम पहलू है। आगे की कार्रवाई पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।
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