Independence Day 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) के शुभ अवसर पर संबोधन के बाद ‘दिमागी नक्सल’ (Dimaagi Naxal) बयान को लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है। बता दें कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री के बयान पर हमला बोला है। जिसमें विपक्ष का आरोप है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मंच का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और असहमति रखने वालों पर निशाना साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रधानमंत्री के भाषण को विकसित भारत, आत्मनिर्भरता और युवाओं की भागीदारी का स्पष्ट रोडमैप बताया है।
मिली जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शनिवार के दिन लाल किले से 13वीं बार स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने अपने भाषण में युवाओं से विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की है। इसी दौरान उन्होंने युवाओं को ‘दिमागी नक्सल’ के प्रभाव से बचने की चेतावनी दी है। दरअसल प्रधानमंत्री का कहना है कि देश के विकास और सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाली मानसिकता से युवाओं को सतर्क रहना चाहिए। आइए यहां पढ़ें विस्तार से पूरी खबर
‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर विपक्ष का पलटवार
प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी। जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री पर कांग्रेस के योगदान का श्रेय लेने का आरोप लगाया। वहीं, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री के बयान को लेकर निशाना साधा।
जयराम रमेश का कहना है कि पहले प्रधानमंत्री अपने विरोधियों के लिए ‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते थे और अब ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। साथ ही उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की हताशा बताया। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर तीखा व्यक्तिगत तंज कसते हुए ‘मास्टर एब्यूजर’ की डिग्री होने की बात कही।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार को विपक्ष और आलोचकों को निशाना बनाने के बजाय देश के सामने मौजूद वास्तविक मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। पार्टी ने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस भाषण में राजनीतिक टिप्पणियों को लेकर भी सवाल उठाए।
महिला आरक्षण पर भी विपक्ष ने उठाए सवाल
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में महिला आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राजनीतिक दलों से मतभेदों से ऊपर उठकर संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की अपील की। प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना देश के लोकतांत्रिक विकास के लिए जरूरी है। हालांकि, विपक्ष ने इस अपील को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े किए। जयराम रमेश ने कहा कि सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद से सर्वसम्मति से पारित हुआ था, लेकिन इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से लागू नहीं किया गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अब महिला आरक्षण के मुद्दे को दोबारा उठाना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक कदम है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लाल किले से झूठ नहीं बोलना चाहिए। अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ही महिला आरक्षण लागू करने की मांग की।

परिसीमन से पहले आरक्षण लागू करने की मांग
CPI(M) महासचिव एम ए बेबी ने ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी को गंभीर आरोप बताते हुए महिला आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। जिसमें उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने के बजाय मौजूदा सीटों पर ही इसे लागू किया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि, इसके लागू होने को परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया से जोड़ा गया है। विपक्षी दल लगातार मांग कर रहे हैं कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने में और देरी नहीं होनी चाहिए।
CPI और TMC ने भी साधा निशाना
CPI महासचिव डी राजा ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसर पर भी असहमति रखने वालों को निशाना बनाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और आलोचना करना नागरिकों तथा विपक्षी दलों का अधिकार है।
TMC नेता साकेत गोखले ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस (independence day) के मंच का इस्तेमाल अपने आलोचकों पर हमला करने के लिए किया। विपक्षी दलों का कहना है कि राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री को देश की एकता, विकास और भविष्य की चुनौतियों पर अधिक जोर देना चाहिए था।
BJP ने पीएम के भाषण को बताया विकास का रोडमैप
बता दें बीजेपी नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए प्रधानमंत्री के संबोधन का बचाव किया। जिसमें बीजेपी का कहना है कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विकसित भारत के लक्ष्य, आत्मनिर्भरता, युवाओं की भूमिका, महिलाओं की भागीदारी और देश की आर्थिक मजबूती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की।
पार्टी नेताओं के अनुसार, ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल को निशाना बनाना नहीं, बल्कि युवाओं को ऐसी सोच से सावधान करना था जो देश के विकास और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम करती है।
बीजेपी ने महिला आरक्षण को लेकर प्रधानमंत्री की अपील को भी महत्वपूर्ण बताया। पार्टी का कहना है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और नारी शक्ति को मजबूत किए बिना विकसित भारत का लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सकता।
स्वतंत्रता दिवस के भाषण पर बढ़ा राजनीतिक विवाद
प्रधानमंत्री मोदी का इस साल का स्वतंत्रता दिवस संबोधन विकास, युवाओं, महिला भागीदारी और आत्मनिर्भर भारत जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया। विपक्ष ने इसे असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश बताया, जबकि बीजेपी इसे राष्ट्रहित और विकास के खिलाफ मानसिकता पर प्रधानमंत्री की चेतावनी बता रही है।
ऐसे में अब इस बयान को लेकर सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है। खासकर महिला आरक्षण, परिसीमन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस का प्रमुख विषय बन सकता है।
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