PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से 11 जुलाई तक तीन देशों के दौरे पर हैं। बता दें की इस यात्रा की शुरुआत इंडोनेशिया से हो रही है। इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जाएंगे। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया का यह चौथा दौरा है, जिससे साफ है कि भारत के लिए यह देश रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बन चुका है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता के बीच यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर कई बड़े फैसले हो सकते हैं।
इंडोनेशिया क्यों है भारत के लिए महत्वपूर्ण?
इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है और दक्षिण-पूर्व एशिया में उसकी मजबूत रणनीतिक स्थिति है। बता दें की हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच स्थित होने के कारण यह वैश्विक समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी कई बार इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं। जिसमें वर्ष 2018 में दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) की शुरुआत की थी। इसके बाद से दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।
रक्षा सहयोग पर रहेगा सबसे ज्यादा जोर
भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। जिनमें दोनों देशों की सेनाएं नियमित सैन्य अभ्यास करती हैं और रक्षा अधिकारियों के बीच लगातार उच्चस्तरीय बातचीत होती रहती है।
इस बार की यात्रा में सबसे ज्यादा चर्चा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को लेकर हो रही है। जिससे माना जा रहा है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस मिसाइल की संभावित बिक्री पर बातचीत आगे बढ़ सकती है। यदि यह समझौता होता है तो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रक्षा साझेदारी और मजबूत होगी। इसके अलावा भारत इंडोनेशिया के सैन्य अधिकारियों और कैडेटों को अपने प्रतिष्ठित रक्षा संस्थानों में प्रशिक्षण भी देता है। इससे दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और विश्वास बढ़ रहा है।
हिंद-प्रशांत में बढ़ेगा समुद्री सहयोग
भारत और इंडोनेशिया हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, सुरक्षित और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करते हैं। दोनों देशों ने वर्ष 2018 में समुद्री सहयोग का साझा विजन भी जारी किया था।
इंडोनेशिया का एक संपर्क अधिकारी भारत के इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर-इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) में भी तैनात है। इससे समुद्री गतिविधियों की निगरानी और सुरक्षा सहयोग को मजबूती मिली है। समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती रोकने और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।
क्रिटिकल मिनरल्स पर भी रहेगा खास फोकस
भारत तेजी से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसके लिए निकेल, कॉपर, बॉक्साइट और टिन जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की जरूरत बढ़ रही है।
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े निकेल भंडार वाले देशों में शामिल है। वैश्विक निकेल रिजर्व का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा इंडोनेशिया के पास मौजूद है। इसके अलावा यह कॉपर, बॉक्साइट और टिन का भी प्रमुख उत्पादक है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान खनिज आपूर्ति श्रृंखला और निवेश को लेकर भी महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना जताई जा रही है।

व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 24.78 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। आसियान देशों में इंडोनेशिया भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
वर्तमान में 130 से अधिक भारतीय कंपनियां इंडोनेशिया में ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। इस यात्रा के दौरान व्यापारिक सहयोग को और विस्तार देने पर भी चर्चा होगी। दोनों देश “विकसित भारत 2047” और “गोल्डन इंडोनेशिया 2045” के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।
मलक्का स्ट्रेट की वजह से बढ़ी रणनीतिक अहमियत
इंडोनेशिया के पास स्थित मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक है। चीन सहित कई देशों का बड़ा समुद्री व्यापार इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
भारत भी इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में विकसित किए जा रहे ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को इसी रणनीति का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा अंडमान एंड निकोबार कमांड के जरिए भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी निगरानी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है।
क्या होंगे इस दौरे के बड़े फायदे?
प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा केवल एक औपचारिक विदेश यात्रा नहीं है बल्कि, यह भारत की एक्ट ईस्ट नीति, हिंद-प्रशांत रणनीति और आर्थिक कूटनीति को नई दिशा देने वाला दौरा साबित हो सकता है। इस यात्रा से रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत होने की उम्मीद है।



