Bihar Assembly By Election: बिहार की राजनीति में विधानसभा उपचुनाव को लेकर बड़ा बवाल मच गया है। बता दें की जनसुराज ने पटना की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस घोषणा के बाद बांकीपुर सीट पर मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।
जानकारी के लिए बता दें जनसुराज के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रवक्ता मनोज भारती ने पटना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने व्यापक विचार-विमर्श के बाद प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है और अब पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी।
बांकीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे प्रशांत किशोर
मनोज भारती ने कहा कि जनसुराज का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि बिहार की राजनीति में नई सोच और नई व्यवस्था स्थापित करना भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से बांकीपुर के मतदाताओं को एक मजबूत विकल्प मिलेगा।
प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी की घोषणा के साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ गया है। जनसुराज के नेताओं का कहना है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा और घर-घर पहुंचकर लोगों से समर्थन मांगा जाएगा।
क्यों खाली हुई बांकीपुर विधानसभा सीट?
दरअसल बांकीपुर विधानसभा सीट BJP के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। ऐसे में नितिन नवीन को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्हें दिल्ली की जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इसके चलते उन्होंने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद इस सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पड़ी। अब इस सीट पर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
बिहार की राजनीति के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
बांकीपुर विधानसभा सीट को बिहार की महत्वपूर्ण शहरी सीटों में गिना जाता है। इस सीट का चुनावी परिणाम केवल एक विधायक चुनने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की ताकत के परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है।
प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने जनसुराज अभियान के माध्यम से राज्यभर में यात्राएं कीं और लोगों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश की। अब पहली बार किसी बड़े उपचुनाव में उनके सीधे मैदान में उतरने से मुकाबला और रोचक हो गया है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस चुनाव के नतीजे से यह भी पता चलेगा कि जनसुराज को जनता के बीच कितना समर्थन मिल रहा है।
चुनाव प्रचार होगा तेज
जनसुराज की ओर से बताया गया है कि उम्मीदवार की घोषणा के बाद चुनाव प्रचार अभियान को और तेज किया जाएगा। पार्टी के कार्यकर्ता मोहल्लों, वार्डों और बूथ स्तर पर लोगों से संपर्क करेंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया, जनसभाओं और पदयात्राओं के माध्यम से भी मतदाताओं तक पहुंचने की योजना बनाई जा रही है। पार्टी का दावा है कि वह स्थानीय मुद्दों को चुनाव का मुख्य एजेंडा बनाएगी।

निर्वाचन आयोग ने जारी किया चुनाव कार्यक्रम
भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम पहले ही घोषित कर दिया है।
आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार—
- 6 जुलाई – अधिसूचना जारी होगी।
- 6 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी।
- 13 जुलाई – नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि।
- 14 जुलाई – नामांकन पत्रों की जांच।
- 16 जुलाई – नाम वापस लेने की अंतिम तिथि।
- 30 जुलाई – मतदान होगा।
- 3 अगस्त – मतगणना होगी।
- 4 अगस्त – पूरी चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
प्रशांत किशोर के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
आपकी जानकारी के लिए बता दें जनसुराज ने प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है, लेकिन उनके सामने कई चुनौतियां भी होंगी।
ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती इस सीट पर मजबूत संगठन और पुराने राजनीतिक दलों के प्रभाव का मुकाबला करना होगा। इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और मतदाताओं की अपेक्षाओं को लेकर भी पार्टी को स्पष्ट रणनीति बनानी होगी। वहीं दूसरी ओर, अन्य राजनीतिक दल भी इस सीट को प्रतिष्ठा का चुनाव मानते हुए पूरी ताकत लगाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में मुकाबला बेहद दिलचस्प होने की संभावना है।
राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना
प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी के बाद बांकीपुर उपचुनाव अब केवल एक सामान्य उपचुनाव नहीं रह गया है। इसे बिहार की बदलती राजनीति और नए राजनीतिक विकल्प की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है।
जनसुराज का दावा है कि जनता पारंपरिक राजनीति से बदलाव चाहती है, जबकि अन्य दल अपने-अपने संगठन और जनाधार के दम पर चुनाव जीतने का भरोसा जता रहे हैं। अब सभी की नजरें नामांकन प्रक्रिया, उम्मीदवारों की अंतिम सूची और चुनाव प्रचार पर टिकी हैं।
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