रेल रोको आंदोलन: राज्य में गेहूं खरीद में हो रही देरी को लेकर किसानों का गुस्सा अब सड़कों और रेल पटरियों पर उतर आया है। जिससे किसान संगठनों ने आज शुक्रवार (17 अप्रैल) को ‘रेल रोको आंदोलन’ का ऐलान किया है, जिसके तहत दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक राज्य के कई हिस्सों में ट्रेनों को रोका जाएगा। बताया जा रहा है कि इस आंदोलन का नेतृत्व किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के साथ-साथ संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), अखिल भारतीय किसान मजदूर संगठन (AKM) और किसान संघर्ष कमेटी (KKM) जैसे संगठनों द्वारा किया जा रहा है।
आंदोलन की वजह गेहूं खरीद में देरी से बढ़ी परेशानी
किसानों का कहना है कि इस साल गेहूं की खरीद प्रक्रिया में करीब दो हफ्ते की देरी हो चुकी है। अब ऐसे में मंडियों में फसल तैयार पड़ी है, लेकिन सरकारी एजेंसियां समय पर खरीद नहीं कर रही हैं। इससे किसानों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडियों में जगह की कमी, फसल के खराब होने का डर और पैसों की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रही हैं।
18 जिलों में असर, ट्रेन सेवाएं प्रभावित
किसान संगठनों के अनुसार, यह रेल रोको आंदोलन पूरे राज्य के 18 जिलों में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान प्रमुख रेलवे ट्रैकों पर किसान बैठकर ट्रेनों की आवाजाही रोकेंगे। इसका असर लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ-साथ लोकल ट्रेनों पर भी पड़ सकता है। यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है, खासकर उन लोगों को जो इस समय यात्रा की योजना बना रहे हैं।

किसान संगठनों की मांगें
किसानों ने सरकार के सामने कुछ मांगें रखी हैं।
- गेहूं खरीद प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
- सभी मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था की जाए।
- फसल का उचित समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित किया जाए।
- खरीद में किसी भी तरह की गुणवत्ता संबंधी बाधा न डाली जाए।
केंद्रीय मंत्री का बयान बारिश से प्रभावित हुई फसल
इस पूरे मामले पर केंद्रीय मंत्री Ravneet Singh Bittu ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इस साल बेमौसम बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। जिसमें उन्होंने कहा कि बारिश की वजह से गेहूं के दानों का रंग और आकार बदल गया है, जिसके चलते खरीद प्रक्रिया में कुछ तकनीकी अड़चनें आई हैं। इसी कारण Food Corporation of India (FCI) ने खरीद मानकों में ढील देने की सिफारिश की है।
सरकार का दावा किसानों को नहीं होगी कोई परेशानी
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा है कि सरकार का खास उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिले और उन्हें किसी भी तरह की दिक्कत न हो। साथ ही भरोसा दिलाया है कि सरकार जल्द ही इस समस्या का समाधान निकालेगी और खरीद प्रक्रिया को सुचारु रूप से शुरू किया जाएगा।
किसानों पर असर नहीं आंदोलन जारी रहेगा
बता दें कि सरकार के इस बयान के बाद भी किसानों पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। जिसमें किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही आंदोलन करेंगे।
किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उनका मानना है कि बार-बार आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होता, बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
मंडियों में बढ़ती समस्या आर्थिक और मानसिक दबाव
मंडियों में बड़ी मात्रा में गेहूं बिना बिके पड़ा हुआ है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। कई किसानों ने कर्ज लेकर फसल तैयार की है और अब समय पर पैसे न मिलने से वे परेशान हैं। इसके अलावा, लगातार बढ़ती अनिश्चितता ने किसानों के मानसिक तनाव को भी बढ़ा दिया है। किसान संगठनों का कहना है कि यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती।
रेल रोको आंदोलन का संभावित असर
अब ऐसे में इस आंदोलन का असर न केवल रेलवे सेवाओं पर पड़ेगा, बल्कि इससे आम लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हो सकती है।
- ट्रेनें देरी से चल सकती हैं।
- कई ट्रेनों को कैंसिल किया जा सकता है।
- यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ सकता है।
अब आगे क्या होगा?
अब ऐसे में मामले को देखते हुए सरकार और किसान संगठनों के बीच जल्द बातचीत नहीं होती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बढ़ सकता है। जिसमें किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
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