Sarhasa News: बिहार के सहरसा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है. जिले के महिषी प्रखंड स्थित एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील खाने के बाद 250 से ज्यादा बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई. बच्चों को उल्टी, पेट दर्द, चक्कर और घबराहट की शिकायत होने लगी. देखते ही देखते स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और गांव के लोग बड़ी संख्या में स्कूल पहुंचने लगे. घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया. बच्चों को पहले स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, लेकिन हालत ज्यादा खराब होने पर कई बच्चों को सहरसा सदर अस्पताल रेफर किया गया. फिलहाल अस्पताल में बच्चों का इलाज जारी है और डॉक्टर लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं. इस घटना के बाद अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि स्कूल में परोसे गए मिड-डे मील में सांप मिला था. यह खबर फैलते ही पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल बन गया.
स्कूल में अचानक बिगड़ने लगी बच्चों की तबीयत
जानकारी के मुताबिक, महिषी प्रखंड के मध्य विद्यालय बलुआ में रोज की तरह बच्चों को दोपहर का भोजन परोसा गया था. बच्चे खाना खाने के बाद अपनी कक्षाओं में लौट गए. लेकिन कुछ ही देर बाद कई बच्चों ने पेट दर्द और उल्टी की शिकायत शुरू कर दी. धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी. कुछ बच्चे घबराकर रोने लगे, जबकि कुछ को चक्कर आने लगे. शिक्षकों और स्कूल प्रशासन ने तुरंत परिजनों और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी. इसके बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई. अभिभावक अपने बच्चों को गोद में उठाकर अस्पताल की ओर दौड़ पड़े. अस्पताल के बाहर भी काफी भीड़ देखने को मिली.
खाने में सांप मिलने का आरोप
घटना के बाद कई अभिभावकों ने दावा किया कि मिड-डे मील में सांप मिला था. एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा घर पहुंचते ही रोने लगा और उसने कहा कि खाने में सांप था. यह बात सुनते ही गांव में खबर तेजी से फैल गई. कुछ ग्रामीणों ने दावा किया कि स्कूल के ऑफिस में रखी खाने की प्लेट में बड़ा सांप दिखाई दिया. उनके मुताबिक, सांप “तेलिया” प्रजाति का लग रहा था. यह दृश्य देखकर कई बच्चे डर गए और कुछ बच्चों की हालत घबराहट की वजह से और खराब हो गई.
गांव में मचा हड़कंप
जैसे ही यह खबर फैली कि स्कूल के खाने में सांप मिला है, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. गांव के लोग बड़ी संख्या में स्कूल के बाहर जमा हो गए. कई अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया. लोगों का कहना था कि बच्चों के खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दिया गया. कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि मिड-डे मील की व्यवस्था में पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई.
अस्पताल में जारी है इलाज
बीमार बच्चों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. डॉक्टरों के मुताबिक, कई बच्चों को फूड पॉइजनिंग जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं. बच्चों को दवा और जरूरी इलाज दिया जा रहा है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल ज्यादातर बच्चों की हालत स्थिर है और घबराने की जरूरत नहीं है. हालांकि कुछ बच्चों को निगरानी में रखा गया है ताकि उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके.
बेहतर इलाज के लिए सहरसा पहुंचे परिवार
ग्रामीणों का कहना है कि महिषी इलाके में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं. इसी वजह से कई परिवार अपने बच्चों को लेकर सीधे सहरसा पहुंचे. अस्पतालों में बड़ी संख्या में परिजन मौजूद हैं. कई माता-पिता अपने बच्चों की हालत देखकर परेशान नजर आए. कुछ अभिभावकों ने कहा कि वे बेहद डर गए थे क्योंकि अचानक इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की तबीयत बिगड़ गई थी.
अभिभावकों ने लगाए गंभीर आरोप
मध्य विद्यालय बलुआ के छात्र मोहम्मद साहिद और मोहम्मद समीर के पिता मोहम्मद शफीक ने कहा कि उनके बेटे, भतीजे और रिश्तेदारों के बच्चे भी बीमार हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने बच्चों के खाने को लेकर गंभीर लापरवाही की है. उनका कहना था कि इलाके के लगभग हर परिवार का कोई न कोई बच्चा प्रभावित हुआ है. अभिभावकों ने पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया और मिड-डे मील के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं. प्रशासन का कहना है कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और अगर किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी. स्कूल के कर्मचारियों और मिड-डे मील बनाने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है.
मिड-डे मील योजना पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर मिड-डे मील योजना की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. सरकार की यह योजना बच्चों को पौष्टिक भोजन देने और स्कूल में उनकी उपस्थिति बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी. लेकिन समय-समय पर कई राज्यों से खराब भोजन, सफाई की कमी और फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के खाने की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखना बेहद जरूरी है.
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
देश के कई हिस्सों में पहले भी मिड-डे मील से जुड़ी गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं. कई बार खाने में कीड़े मिलने, खराब भोजन परोसने या सफाई में लापरवाही की शिकायतें मिली हैं. ऐसी घटनाएं बच्चों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं. यही वजह है कि अभिभावक इस तरह की खबरों को लेकर बेहद चिंतित रहते हैं.
बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी
शिक्षा और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को दिया जाने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित और साफ होना चाहिए. खाने की नियमित जांच और स्वच्छता के नियमों का पालन बेहद जरूरी माना जाता है. अगर किसी तरह की लापरवाही होती है, तो उसका सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ता है.
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पूरे मामले में जांच जारी है। प्रशासन ने खाने के नमूने लैब भेज दिए हैं और रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है. जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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