Election Commission SIR Form: देश में मतदाता लिस्ट को ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत बड़ा बदलाव किया है। जिसमें आयोग ने नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में एक नया सेक्शन जोड़ दिया है। वहीं इस बदलाव के बाद अब नए वोटर बनने के लिए आवेदन करने वाले लोगों से उनके माता-पिता और कुछ मामलों में दादा-दादी से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी।
जानकारी के लिए बता दें चुनाव आयोग ने साफ कहा कि यह नया सेक्शन पूरी तरह अनिवार्य नहीं है, लेकिन ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में इसे देखकर आगे बढ़ना जरूरी होगा। दरअसल इस बदलाव का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना और भविष्य में होने वाले विवादों को कम करना है।
क्या है फॉर्म-6?
आपकी जानकारी के लिए बता दें की फॉर्म-6 चुनाव आयोग का वह आवेदन फॉर्म है, जिसका उपयोग नए मतदाता बनने के लिए किया जाता है। यह फॉर्म उन लोगों के लिए होता है—
- जो 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं।
- जिन्होंने भारतीय नागरिकता प्राप्त की है और पहली बार वोटर बनना चाहते हैं।
- जिनका नाम किसी कारणवश मतदाता सूची से हट गया था और वे दोबारा अपना नाम जुड़वाना चाहते हैं।
- अब इसी फॉर्म में एक नया सेक्शन जोड़कर आवेदन प्रक्रिया को और विस्तृत बनाया गया है।
फॉर्म-6 में क्या बदलाव किया गया है?
दरअसल चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में सेक्शन J और सेक्शन K के बीच एक नया घोषणा (Declaration) सेक्शन जोड़ा है। इसमें आवेदक को अपने या अपने परिवार से संबंधित तीन विकल्पों में से किसी एक का चयन करना होगा।
नए सेक्शन में तीन विकल्प दिए गए हैं—
- पहला विकल्प: आवेदक का नाम पिछले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की मतदाता सूची में मौजूद था।
- दूसरा विकल्प: आवेदक के माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछले SIR की मतदाता सूची में दर्ज है।
- तीसरा विकल्प: न तो आवेदक का नाम और न ही उसके माता-पिता का नाम पिछले SIR की मतदाता सूची में है।
यदि कोई व्यक्ति पहला या दूसरा विकल्प चुनता है, तो उसे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र (Booth) और मतदाता सूची में दर्ज सीरियल नंबर की जानकारी भी देनी होगी।
The Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls, launched on June 30, the process of filling the enumeration form-offline and online, with ease.
How to fill the enumeration form#GreaterBengaluruAuthority #SIR pic.twitter.com/tRj3YxjnLb
— Greater Bengaluru Authority (@GBA_office) July 11, 2026
तीसरे विकल्प पर क्या होगा?
ऐसे में अगर किसी आवेदक के पास पहले दो विकल्पों से जुड़ी जानकारी नहीं है, तो वह तीसरा विकल्प चुन सकता है। हालांकि चुनाव आयोग ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि तीसरा विकल्प चुनने के बाद आवेदन की प्रक्रिया में कोई अतिरिक्त जांच होगी या नहीं। यही कारण है कि इस नए प्रावधान को लेकर कई लोगों के मन में सवाल भी उठ रहे हैं।
I just completed my Special Intensive Revision 2026 Enumeration Form Submission Online. Just takes Five Min. Thought I'll share for everyone to benefit.
Of course, I have my election card properly linked and my EPIC number. If you are confused or something is not linked… pic.twitter.com/TtQyRZTk8O
— Fundamental Investor ™ 🇮🇳 (@FI_InvestIndia) July 5, 2026
यह बदलाव क्यों किया गया?
बता दें चुनाव आयोग ने यह कदम पिछले वर्षों में हुई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के अनुभवों को देखते हुए उठाया है। जिसमें पिछले साल 10 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के दौरान लगभग 5.58 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। इसके बाद यह सवाल उठने लगे कि जिन लोगों के नाम हटे हैं, उनके परिवार के अन्य सदस्यों, खासकर उनके बच्चों के वोटर बनने की प्रक्रिया पर इसका क्या असर पड़ेगा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटने की खबरें सामने आई थीं। कई लोगों की शिकायतें लंबित रहने के कारण वे मतदान नहीं कर पाए थे। इसी तरह की परिस्थितियों से बचने और रिकॉर्ड का बेहतर मिलान करने के लिए चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 में नया सेक्शन जोड़ने का फैसला किया है।
डाउनलोड होने वाले फॉर्म में नहीं दिख रहा नया सेक्शन
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव आयोग के ECINET पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करते समय नया सेक्शन दिखाई दे रहा है, लेकिन वेबसाइट पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध PDF फॉर्म-6 में अभी यह बदलाव शामिल नहीं किया गया है। यानी जो लोग ऑनलाइन आवेदन कर रहे हैं, उन्हें नया सेक्शन भरने का विकल्प दिखाई देगा, जबकि ऑफलाइन डाउनलोड किए गए पुराने फॉर्म में यह सुविधा अभी मौजूद नहीं है।
क्या नया सेक्शन भरना अनिवार्य है?
चुनाव आयोग के अनुसार यह नया सेक्शन पूरी तरह अनिवार्य नहीं है। लेकिन ऑनलाइन आवेदन के दौरान इस सेक्शन को देखे बिना या उसमें विकल्प चुने बिना आवेदन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती। इसलिए आवेदकों को उपलब्ध विकल्पों में से किसी एक का चयन करना होगा।
इन राज्यों में चल रही है SIR प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने फरवरी 2026 में 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) शुरू करने की घोषणा की थी। फिलहाल जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया चल रही है, उनमें शामिल हैं—
- आंध्र प्रदेश
- अरुणाचल प्रदेश
- चंडीगढ़
- दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव
- हरियाणा
- हिमाचल प्रदेश
- जम्मू-कश्मीर
- झारखंड
- कर्नाटक
- लद्दाख
- महाराष्ट्र
- मणिपुर
- मेघालय
- मिजोरम
- नागालैंड
- दिल्ली
- ओडिशा
- पंजाब
- सिक्किम
- त्रिपुरा
- तेलंगाना
- उत्तराखंड
आवेदकों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
ऐसे में यदि आप पहली बार वोटर बनने के लिए आवेदन कर रहे हैं, तो आवेदन भरने से पहले अपने परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी उपलब्ध हो तो उसे साथ रखें। यदि आपके माता-पिता या दादा-दादी पहले से मतदाता सूची में दर्ज हैं, तो उनकी विधानसभा, बूथ और मतदाता सूची का क्रमांक आवेदन प्रक्रिया को आसान बना सकता है।
यदि ऐसी जानकारी उपलब्ध नहीं है, तो तीसरा विकल्प चुनकर भी आवेदन किया जा सकता है। हालांकि भविष्य में यदि चुनाव आयोग अतिरिक्त दस्तावेज या सत्यापन मांगे, तो उसके लिए तैयार रहना चाहिए।
क्या होगा इस बदलाव का असर?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि फॉर्म-6 में जोड़ा गया नया सेक्शन मतदाता सूची के रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करेगा। इससे परिवार आधारित रिकॉर्ड का मिलान आसान होगा और डुप्लीकेट या गलत प्रविष्टियों की पहचान भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि जिन आवेदकों के पास पुराने मतदाता रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें आवेदन प्रक्रिया के दौरान अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में चुनाव आयोग की ओर से आगे जारी होने वाले दिशा-निर्देश इस प्रक्रिया को और स्पष्ट करेंगे।
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