Suvendu Adhikari: पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ और सीमा सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari ने रविवार को बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने पिछले एक महीने में 4,800 कथित अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेज दिया है। इसके साथ ही 836 अन्य लोगों को भी जल्द डिपोर्ट किए जाने की तैयारी चल रही है। मुख्यमंत्री के इस बयान ने राज्य की राजनीति और सीमा सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” नीति के तहत काम कर रही है। इस नीति का उद्देश्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करना, उन्हें सरकारी रिकॉर्ड से हटाना और फिर कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके देश वापस भेजना है।
एक महीने में 4,800 लोगों को भेजने का दावा
मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के अनुसार, जिन लोगों को डिपोर्ट किया गया है वे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दायरे में नहीं आते थे। सरकार का कहना है कि उनकी पहचान अवैध प्रवासियों के रूप में की गई और उसके बाद उन्हें सीमा सुरक्षा बल (BSF) की मदद से वापस भेजा गया। उन्होंने बताया कि फिलहाल 836 अन्य लोग विभिन्न होल्डिंग सेंटरों में रखे गए हैं और उनकी पहचान तथा दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें भी बांग्लादेश भेजा जाएगा।
‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ पर सरकार का फोकस
सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही अवैध घुसपैठ को अपनी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने पहले भी कहा था कि राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान की जाएगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होगी। सरकार का दावा है कि पहले चरण में संदिग्ध अवैध प्रवासियों की पहचान की जाती है। इसके बाद उनके दस्तावेजों की जांच होती है और यदि वे भारतीय नागरिकता साबित नहीं कर पाते हैं, तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाती है।
जेल नहीं, अब होल्डिंग सेंटर
बंगाल सरकार ने अवैध प्रवासियों को रखने की व्यवस्था में भी बदलाव किया है। पहले ऐसे लोगों को जेलों में रखा जाता था, लेकिन अब सीमावर्ती जिलों में विशेष होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन सेंटरों में रखे गए लोगों को बाद में BSF को सौंपा जाता है ताकि उन्हें उनके देश वापस भेजा जा सके। इस व्यवस्था से डिपोर्टेशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाने की कोशिश की जा रही है।
सीमा सुरक्षा पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल की 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश से लगती है। इस कारण राज्य में सीमा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए BSF को लगभग 100 किलोमीटर भूमि उपलब्ध कराई है, ताकि सीमा पर बाड़ लगाने और निगरानी बढ़ाने का काम तेज किया जा सके। विशेष रूप से उत्तर बंगाल के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण “चिकन नेक” क्षेत्र को प्राथमिकता दी जा रही है।
रेलवे स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी
हाल के दिनों में राज्य सरकार ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस को भी संदिग्ध घुसपैठियों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा था कि रेलवे स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार के अनुसार, जो लोग CAA के दायरे में नहीं आते और अवैध रूप से देश में पाए जाते हैं, उन्हें BSF को सौंपा जाएगा ताकि डिपोर्टेशन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
CAA और घुसपैठ का मुद्दा
सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर रही है कि नागरिकता संशोधन कानून के तहत पात्र लोगों और अवैध घुसपैठियों में अंतर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि जिन लोगों को CAA के तहत संरक्षण प्राप्त है, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ हो रही है जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं और जो अवैध रूप से राज्य में रह रहे हैं।
राजनीतिक बहस भी तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। भाजपा इसे सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रही है, जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि किसी भी कार्रवाई में मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन होना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में घुसपैठ और नागरिकता का मुद्दा लंबे समय से चुनावी राजनीति का अहम विषय रहा है और आने वाले समय में भी यह चर्चा के केंद्र में रह सकता है।
Read Related News: भारत पहुंचे इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगिओनो,जयशंकर संग वार्ता में कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा



