West Bengal OBC List: पश्चिम बंगाल में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। बताया जा रहा है राज्य सरकार ने OBC लिस्ट का पुनर्गठन करते हुए उन समुदायों को सूची से बाहर कर दिया है, जिन्हें वर्ष 2010 और 2012 में जोड़ा गया था। संशोधन के बाद अब राज्य की OBC सूची में कुल 66 जातियां ही शामिल रहेंगी। इनमें 54 हिंदू और 12 मुस्लिम समुदाय की जातियां हैं।
ऐसे में सरकार का कहना है कि यह बदलाव न्यायालय के फैसले और पुराने वैध रिकॉर्ड के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही OBC आरक्षण की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है और पहले की तुलना में आरक्षण का दायरा सीमित किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम बंगाल में OBC आरक्षण की शुरुआत मंडल आयोग की सिफारिशों के बाद हुई थी। वर्ष 1993 में राज्य सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े 66 समुदायों को OBC सूची में शामिल किया था। उस समय इन्हीं समुदायों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण का लाभ मिलता था।
इसके बाद वर्ष 2010 में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने OBC सूची का विस्तार करते हुए 42 नई जातियां जोड़ीं। फिर वर्ष 2012 में ममता बनर्जी सरकार ने 35 और समुदायों को OBC सूची में शामिल कर दिया। इस तरह OBC सूची में कुल 143 समुदाय शामिल हो गए।
कोर्ट के फैसले के बाद बदली तस्वीर
OBC लिस्ट में जोड़े गए नए समुदायों को लेकर बड़ा मामला अदालत में पहुंचा। बता दें की मई 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2010 और 2012 में जोड़ी गई 77 जातियों की मान्यता रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि इन समुदायों को पिछड़ा घोषित करने से पहले आवश्यक सामाजिक और शैक्षणिक सर्वे नहीं कराया गया था।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि वर्ष 2010 से पहले जारी OBC प्रमाणपत्र वैध रहेंगे, जबकि बाद में जारी कई प्रमाणपत्रों पर फैसला लागू होगा। इसके बाद राज्य सरकार ने OBC सूची का पुनर्गठन करते हुए पुरानी सूची को फिर से लागू कर दिया।
नई OBC सूची में शामिल 12 मुस्लिम जातियां
संशोधन के बाद पश्चिम बंगाल की OBC सूची में सिर्फ 12 मुस्लिम समुदायों को बरकरार रखा गया है। ये वे समुदाय हैं जो वर्ष 1993 से ही OBC सूची का हिस्सा रहे हैं।
इनमें शामिल प्रमुख समुदाय हैं—
- जोला (जुलाहा)
- फकीर (साईं)
- शाह (शाहजी)
- राइन (कुंजड़ा)
- शेरशाहबादिया
- नई (हज्जाम)
- चौदुली मुस्लिम
- पहाड़िया मुस्लिम
- धुनिया (मंसूरी)
- कसाई (कुरैशी)
- अन्य दो पारंपरिक रूप से सूचीबद्ध समुदाय

किन मुस्लिम समुदायों को लिस्ट से हटाया गया?
दरअसल नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई मुस्लिम समुदाय OBC सूची से बाहर हो गए हैं। इनमें शामिल हैं-
- मुस्लिम नेहरिया
- मुस्लिम हलदर
- मुस्लिम सानपुई
- मुस्लिम माली
- घोसी (मुस्लिम)
- मुस्लिम दर्जी
- ओस्तागर
- इदरीसी
- मुस्लिम राजमिस्त्री
- मुस्लिम बटियारा
- मुस्लिम मोल्ला
- धाली (मुस्लिम)
सहित कई अन्य समुदाय शामिल हैं।
बता दें की इन समुदायों में से कई उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की OBC सूची में अब भी शामिल हैं। अलग-अलग राज्यों में OBC सूची स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय होती है।
आरक्षण व्यवस्था में क्या बदलाव हुआ?
नई व्यवस्था के तहत OBC आरक्षण की संरचना में भी बदलाव किया गया है। पहले राज्य में OBC-A और OBC-B श्रेणियों के तहत कुल 17 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान था। संशोधन के बाद इसे घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है।
वर्तमान आरक्षण व्यवस्था के अनुसार—
अनुसूचित जाति (SC) – 22%
अनुसूचित जनजाति (ST) – 6%
OBC – 7%
दिव्यांगजन – 3%
सरकार का क्या तर्क है?
सरकार का कहना है कि OBC लिस्ट में वही समुदाय रखे गए हैं, जिन्हें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा साबित करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद था। साथ ही यह भी कहा गया है कि 2010 और 2012 में शामिल कई समुदायों को बिना आवश्यक सर्वे और वैज्ञानिक अध्ययन के OBC सूची में जोड़ा गया था, जिसे अदालत ने भी असंवैधानिक माना।
इसी आधार पर पुरानी सूची को बहाल किया गया है और वर्ष 1993 की मूल OBC सूची को फिर लागू किया गया है।
क्या होगा इसका असर?
दरअसल नई व्यवस्था लागू होने के बाद जिन समुदायों को OBC सूची से बाहर किया गया है, उन्हें अब राज्य सरकार की OBC आरक्षण व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, सूची में शामिल 66 समुदाय पहले की तरह OBC श्रेणी के तहत आरक्षण और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ लेते रहेंगे। हालांकि यह मामला सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले समय में इस फैसले को लेकर कानूनी और राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है।
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