Amit Shah Mission 2029: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश में नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की लड़ाई को और तेज करने का ऐलान किया है। जिसमें उनका कहना है कि केंद्र सरकार ने साल 2026 से 2029 (Drug Mission 2029) तक के लिए ड्रग्स के खिलाफ एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल ड्रग तस्करों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि नशीले पदार्थों के पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।
वहीं, अमित शाह का कहना है कि देश के युवाओं को नशे से बचाना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए युवा शक्ति की भूमिका अहम है। ऐसे में युवाओं को नशे की गिरफ्त से दूर रखना जरूरी है।
छोटे तस्करों तक सीमित नहीं रहेगी कार्रवाई
गृह मंत्री ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ सरकार की रणनीति में अब केवल छोटे स्तर के तस्करों और अपराधियों की गिरफ्तारी पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। एजेंसियों का फोकस उन बड़े नेटवर्क पर है, जो देश में नशीले पदार्थों की सप्लाई, फंडिंग और वितरण को नियंत्रित करते हैं।
सरकार अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय ड्रग नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है। इसके साथ ही ड्रग्स से मिलने वाले अवैध पैसे, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होने वाले भुगतान और डार्कनेट के इस्तेमाल पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।
2019 में शुरू हुई थी NCORD व्यवस्था
अमित शाह के मुताबिक, ड्रग तस्करी के खिलाफ अलग-अलग एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए साल 2019 में चार स्तरीय नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी NCORD व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स बनाई गई है। इसका उद्देश्य राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
ड्रग्स से जुड़ी जानकारी साझा करने और नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए ‘MANAS’ हेल्पलाइन 1933 भी शुरू की गई है। सरकार इसके जरिए नशे की गिरफ्त में आए युवाओं के पुनर्वास और सहायता पर भी जोर दे रही है।
26 लाख किलो से बढ़कर 1.19 करोड़ किलो से ज्यादा ड्रग्स जब्त
अमित शाह ने सरकार की कार्रवाई से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि साल 2004 से 2014 के बीच देश में करीब 26 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। वहीं, साल 2014 से 2026 के बीच यह आंकड़ा बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से ज्यादा हो गया। सरकार के मुताबिक, इस दौरान जब्त किए गए नशीले पदार्थों की अनुमानित कीमत करीब 1.89 लाख करोड़ रुपये है।
गृह मंत्री ने यह भी बताया कि 2014 से 2026 के बीच करीब 48.66 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट किया गया। इससे सरकार के ड्रग्स के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बड़े स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है।

100 ड्रग नेटवर्क को खत्म करने का लक्ष्य
अब सरकार ने अगले तीन वर्षों के लिए कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं। इनमें सबसे अहम लक्ष्य 100 अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
सरकार का लक्ष्य ऐसे 100 भगोड़ों को भी विदेश से भारत वापस लाना है, जो नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में वांछित हैं। इसके अलावा अवैध सिंथेटिक ड्रग्स और प्रीकर्सर केमिकल तैयार करने वाली 100 गुप्त लैब को भी खत्म करने की योजना बनाई गई है। इसका मतलब साफ है कि सरकार ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई को केवल सड़क स्तर पर होने वाली तस्करी तक सीमित नहीं रखना चाहती। ड्रग्स तैयार करने, उसकी सप्लाई, फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन तक पूरे सिस्टम को निशाना बनाया जाएगा।
कई एजेंसियां मिलकर चलाएंगी अभियान
मिशन 2029 को सफल बनाने के लिए केंद्र और राज्य की कई एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। इस अभियान में सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारतीय तटरक्षक, सीमा शुल्क विभाग, डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED), फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और राज्य पुलिस की भूमिका अहम होगी।
सरकार का जोर एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने और संयुक्त कार्रवाई पर रहेगा। खासतौर पर सीमा क्षेत्रों, समुद्री रास्तों और डिजिटल माध्यमों से होने वाली ड्रग तस्करी पर नजर बढ़ाई जाएगी।
डार्कनेट और क्रिप्टो पेमेंट पर भी नजर
आज के समय में ड्रग तस्करी का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। तस्कर इंटरनेट, डार्कनेट, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और क्रिप्टोकरेंसी जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सरकार ने पारंपरिक कार्रवाई के साथ डिजिटल नेटवर्क पर भी निगरानी बढ़ाने की रणनीति बनाई है।
जांच एजेंसियां ड्रग्स के कारोबार से जुड़े पैसों के लेनदेन का पता लगाने पर भी ध्यान देंगी। इसका मकसद उन लोगों और संगठनों तक पहुंचना है, जो पर्दे के पीछे रहकर पूरे नेटवर्क को आर्थिक मदद उपलब्ध कराते हैं।
युवाओं को नशे से दूर रखना बड़ी प्राथमिकता
अमित शाह ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। अगर युवा नशे की गिरफ्त में आते हैं तो इसका असर परिवार, समाज और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
इसी वजह से सरकार कार्रवाई के साथ जागरूकता और पुनर्वास पर भी जोर दे रही है। आने वाले तीन साल में ‘मिशन 2029’ के तहत ड्रग्स के नेटवर्क को तोड़ने के साथ नशे की लत से प्रभावित लोगों को मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश भी जारी रहेगी।
अमित शाह के इस ऐलान के बाद साफ है कि केंद्र सरकार ने ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई को एक नए और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी कर ली है। अब लक्ष्य सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि नशे के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करना है।
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