BRICS Summit 2026: भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की भी उम्मीद है। बताया जा रहा है की इस खास मोके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हो सकती है। अब अगर दोनों नेताओं की अहम मुलाकात होती है, तो यह 2020 की गलवान घाटी झड़प के बाद शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। साथ ही, इस बैठक को भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें यह खास अवसर नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। ऐसे में आइए जानते यहां खबर को लेकर पूरी जानकारी
गलवान झड़प के बाद बिगड़े थे भारत-चीन संबंध
भारत और चीन के रिश्तों में सबसे बड़ा तनाव जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद आया था। इस घटना में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे, जबकि चीन ने अपने 4 सैनिकों के मारे जाने की जानकारी दी थी। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर दोनों देशों के बीच लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा।
गलवान की घटना के बाद भारत और चीन के राजनीतिक और सैन्य संबंधों में भी काफी तनाव देखने को मिला। सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती हुई और कई दौर की सैन्य एवं राजनयिक बातचीत के बावजूद स्थिति को सामान्य होने में काफी समय लगा।
धीरे-धीरे कम हुआ सीमा पर तनाव
बता दें कि पिछले कुछ समय में भारत और चीन ने सीमा पर तनाव कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच कुछ इलाकों में पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी। इसके बाद LAC पर स्थिति को सामान्य करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय बातचीत भी जारी रही। अगस्त 2026 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता हुई। इस बातचीत में सीमा पर शांति बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
शी जिनपिंग की यात्रा से पहले बढ़ा कूटनीतिक संपर्क
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा (Xi Jinping India Visit 2026) से पहले दोनों देशों के बीच राजनयिक संपर्क भी तेज हुआ है। भारत और चीन के अधिकारियों के बीच सीमा से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत हुई है। सीमा मामलों को लेकर वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन यानी WMCC की बैठक भी हुई।
इसके अलावा विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर भी सीमा विवाद को लेकर चर्चा जारी रही है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य LAC पर शांति बनाए रखना और दोनों देशों के बीच संवाद को लगातार जारी रखना है।

अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा भी अहम
भारत और चीन के रिश्तों में केवल पूर्वी लद्दाख ही नहीं, बल्कि अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे दक्षिणी तिब्बत के रूप में बताता रहा है। भारत चीन के इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज करता है।
चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदलने की कोशिश भी की गई है। भारत ने हर बार इस तरह के कदमों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी भारतीय क्षेत्र का नाम बदलने से उसकी वास्तविक स्थिति नहीं बदल सकती। भारत का स्पष्ट रुख है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है।
मोदी-शी बैठक में किन मुद्दों पर हो सकती है चर्चा?
अगर BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक होती है, तो सीमा विवाद सबसे प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है। इसके अलावा LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखने, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने तथा क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर भी चर्चा हो सकती है।
ऐसे में दोनों देशों के बीच लोगों के संपर्क और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने का मुद्दा भी बातचीत का हिस्सा बन सकता है। भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध काफी बड़े हैं, लेकिन सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्तों पर इसका असर भी पड़ा है।
पहले भी हो चुकी है मोदी-शी की मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की 2024 में रूस के कजान में हुए BRICS सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बातचीत हुई थी। इसके बाद 2025 में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
अब नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में दोनों नेताओं की संभावित द्विपक्षीय बैठक पर सबकी नजर रहेगी। अगर यह बैठक होती है, तो इससे भारत-चीन संबंधों में आगे की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, सीमा विवाद अभी भी दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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