CBSE Three Language Policy: देशभर के लाखों छात्रों के लिए सीबीएसई ने एक बड़ी खुशखबरी दी है। दरअसल, CBSE ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार को लेकर एक नया फैसला लिया है, जिससे बच्चों की पढ़ाई में तो बदलाव होगा ही साथ में उनका भविष्य भी उज्ज्वल बनेगा। ऐसे में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का यह फैसला लाखों छात्रों के लिए किसी राहत से कम नहीं रहने वाला है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू (Three-Language Policy) न करने का अहम फैसला लिया है। यहां जानें इससे जुड़ी हर एक डिटेल
थ्री लैंग्वेज पॉलिसी लागू नहीं
मिली जानकारी के अनुसार, सीबीएसई बोर्ड ने पहले जारी किए गए प्रस्ताव में बदलाव करते हुए साफ कहा है कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में कक्षा 10 में पढ़ रहे विद्यार्थियों पर थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three-Language Policy) लागू नहीं होगी। यानी मौजूदा 10वीं के छात्र इस साल केवल दो भाषाओं के साथ अपनी पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा पूरी करेंगे।
सीबीएसई की ओर से जारी की गई नई गाइडलाइन (CBSE New Guidelines) के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत थ्री लैंग्वेज पॉलिसी चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव न पड़े। बोर्ड का कहना है कि भाषा शिक्षा को मजबूत करना उसका मुख्य उद्देश्य है, लेकिन छात्रों की पढ़ाई का संतुलन बनाए रखना सबसे अधिक जरूरी है।
सीबीएसई की नई गाइडलाइन क्या है? (What is the New CBSE Guideline?)
CBSE ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दिशा-निर्देशों जारी कर दिए है, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों को तीसरी भाषा पढ़ने, चुनने या उसकी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे लाखों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।
सीबीएसई बोर्ड ने यह भी साफ कहा है कि वर्तमान कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों के लिए भी फिलहाल कोई अतिरिक्त तीसरी भाषा अनिवार्य नहीं होगी। इन छात्रों के लिए भाषा संबंधी व्यवस्था नई गाइडलाइन के अनुसार चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।
विदेशी भाषा पढ़ने वाले छात्रों के लिए नए नियमॉ
सीबीएसई की नई गाइडलाइन (CBSE’s New Guidelines) में विदेशी भाषाएं पढ़ रहे विद्यार्थियों के लिए भी निर्देश दिए गए है। दरअसल, विदेशी छात्र अपनी चुनी हुई विदेशी भाषा की पढ़ाई जारी रख सकते हैं, लेकिन इसके साथ-साथ उन छात्रों को एक भारतीय भाषा की भी पढ़नी करना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने साफ तौर पर कहा है कि इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना और विद्यार्थियों को देश की भाषाई विविधता से जोड़ना है।

नई भाषा को रोचक तरीके से सिखाया जाएगा
CBSE ने कहा है कि केवल किताबों के जरिए भाषा सिखाने के बजाय विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक और व्यावहारिक बनाया जाएगा। नई भाषा सीखने के लिए सभी छात्रों को विभिन्न शिक्षण सामग्री, गतिविधियां, डिजिटल संसाधन और अन्य प्रैक्टिकल माध्यम की सुविधा भी उपलब्ध होगी। इससे विद्यार्थियों को भाषा सीखना आसान हो जाएगा।
NEP 2020 में क्या है प्रावधान?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाएं सीखने की व्यवस्था की गई है। इसमें यह प्रावधान है कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है। इस शिक्षा नीति (Education Policy) का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ विद्यार्थियों को बहुभाषी बनाना, भारतीय भाषाओं का संरक्षण करना और विभिन्न क्षेत्रों की भाषाई संस्कृति से परिचित कराना है।
विरोध के बाद बदला फैसला
CBSE ने पहले कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ाने की योजना बनाई थी, लेकिन इस प्रस्ताव को लेकर कई शिक्षकों, अभिभावकों समेत कई लोगों ने चिंता जताई थी। उनका कहना था कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी (Board Exam Preparation) कर रहे विद्यार्थियों पर तीसरी भाषा का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। इस मुद्दे पर लगातार विरोध और सुझाव मिलने के बाद बोर्ड ने अपने फैसले में बदलाव करते हुए यह नई गाइडलाइन जारी की है।
बोर्ड का क्या है उद्देश्य?
CBSE का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं के प्रति जागरूक करना का भी है। बोर्ड चाहता है कि छात्र विभिन्न भारतीय भाषाओं को समझें, पढ़ें और बोलने में सक्षम बन सके। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी नई व्यवस्था के कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो और उन पर अनावश्यक दबाव न बढ़े, ताकि उनकी पढ़ाई में किसी भी तरह की दिक्कत न आए।
छात्रों और अभिभावकों को मिली राहत
सीबीएसई की नई गाइडलाइन जारी होने के बाद से लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। अब वर्तमान कक्षा 10 के छात्रों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान किसी अतिरिक्त भाषा की चिंता व तैयारी नहीं करनी की जरूरत होगी।
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