Commonwealth Games 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का शुक्रवार भारत के लिए बेहद खास रहा। ग्लासगो में खेले गए इस दिन भारतीय खिलाड़ियों ने कुल छह पदक जीते और कई ऐतिहासिक उपलब्धियां अपने नाम कीं। सबसे ज्यादा चर्चा नीरज चोपड़ा की रही, जिन्होंने पुरुषों की जेवलिन थ्रो स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। उनके साथ ही यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज जीतकर भारत के लिए जेवलिन में डबल पोडियम फिनिश सुनिश्चित की। उसी दिन जूडो में अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने भारत के लिए ऐतिहासिक गोल्ड जीते, जबकि तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में भारत का पहला CWG पदक दिलाकर नया इतिहास रच दिया।
नीरज चोपड़ा ने दिलाया सिल्वर
पुरुषों की जेवलिन थ्रो फाइनल में नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया और दूसरा स्थान हासिल करते हुए सिल्वर मेडल जीता। यह उनका CWG में दूसरा पदक है; इससे पहले वे 2018 में गोल्ड जीत चुके हैं। फाइनल में श्रीलंका के रुमेश पथिराजे ने 89.75 मीटर के शानदार थ्रो के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। नीरज के साथ पोडियम पर यशवीर सिंह भी थे, जिन्होंने अपने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर ब्रॉन्ज मेडल जीता। भारत के लिए यह डबल पोडियम फिनिश इसलिए भी खास रहा क्योंकि नीरज और यशवीर दोनों ने दबाव के बीच बेहतरीन प्रदर्शन किया। मुकाबले के बाद नीरज ने यशवीर की तारीफ की और कहा कि ऐसे मौके पर युवा खिलाड़ी का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ देना टीम इंडिया के लिए गर्व की बात है।
जूडो में भारत का ऐतिहासिक दिन
शुक्रवार का दिन भारतीय जूडो के लिए भी स्वर्णिम साबित हुआ। अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स इतिहास में भारत को जूडो में पहला स्वर्ण दिलाया। उन्होंने कनाडा की हैडी क्वाच को कड़े मुकाबले में हराया। दूसरे गोल्ड मेडल के साथ हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में जीत दर्ज की और भारत को जूडो में पहली बार डबल गोल्ड दिलाया। अस्मिता की जीत इसलिए भी भावुक रही क्योंकि यह उपलब्धि उन्होंने अपने पिता के निधन के कुछ ही महीनों बाद हासिल की। वहीं हर्ष सिंह की जीत ने भारतीय जूडो के लिए एक नया अध्याय खोल दिया। देशभर में इन दोनों खिलाड़ियों की तारीफ हो रही है।
तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में रचा इतिहास
एथलेटिक्स ट्रैक पर भी भारत ने इतिहास लिखा। तेजस्विन शंकर ने पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा में ब्रॉन्ज जीतकर कॉमनवेल्थ गेम्स में इस इवेंट में भारत का पहला पदक दिलाया। उन्होंने कुल 7,976 अंक हासिल किए। चोट की परेशानी के बावजूद तेजस्विन ने दो दिनों तक चली कठिन 10-इवेंट प्रतियोगिता में शानदार जज्बा दिखाया।
एक दिन में छह पदक, भारत की मेडल टैली हुई मजबूत
शुक्रवार को भारत ने छह पदक जीते 2 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज। इस शानदार प्रदर्शन ने भारत की कुल पदक संख्या को 23 तक पहुंचा दिया, जिसमें 5 गोल्ड, 12 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत पदक तालिका में 10वें स्थान पर पहुंच गया। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मुकाम है, क्योंकि एक ही दिन में छह पदक मिलना इस संस्करण का अब तक का सबसे बड़ा एक-दिनी प्रदर्शन रहा। भारतीय दल के लिए यह न केवल पदकों की संख्या बढ़ाने वाला दिन था, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी रहा।
नीरज का सफर और टीम भावना
नीरज चोपड़ा के लिए यह प्रतियोगिता खास इसलिए भी रही क्योंकि उन्होंने लंबे अंतराल के बाद फिर से CWG मंच पर शानदार वापसी की। फाइनल में उन्होंने शुरू से ही खुद को पदक की दौड़ में बनाए रखा, लेकिन आखिरी कोशिशों में श्रीलंका के रुमेश पथिराजे का 89.75 मीटर का थ्रो उनसे आगे निकल गया। इसके बावजूद नीरज का 85.83 मीटर का थ्रो भारत के लिए मजबूत उपलब्धि रहा। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि नीरज ने खुद यशवीर सिंह की खुलकर तारीफ की। उन्होंने माना कि कठिन परिस्थिति में युवा साथी का पर्सनल बेस्ट थ्रो करना बड़ी बात है। यह भारतीय एथलेटिक्स की बदलती तस्वीर भी दिखाता है, जहां अब एक से ज्यादा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक के दावेदार बन रहे हैं।
भारतीय खेलों के लिए प्रेरणादायक दिन
कॉमनवेल्थ गेम्स का यह दिन भारत के लिए केवल पदकों का दिन नहीं था, बल्कि कई नई कहानियों और संघर्षों का भी दिन था। जूडो में ऐतिहासिक गोल्ड, डेकाथलॉन में पहली बार पदक और जेवलिन में डबल पोडियम इन सभी ने यह दिखाया कि भारतीय खिलाड़ी अब सिर्फ एक या दो खेलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई क्षेत्रों में दुनिया से टक्कर लेने को तैयार हैं। खिलाड़ियों की यह लहर आने वाले दिनों में भारत की पदक संख्या को और ऊपर ले जा सकती है। फिलहाल, शुक्रवार का दिन भारतीय खेल इतिहास में उन सुनहरे दिनों में दर्ज हो गया है, जब एक साथ कई खेलों में नई इबारत लिखी गई।
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