Heat Wave School Holiday: देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है। अप्रैल के अंत में ही तापमान कई शहरों में 45 डिग्री के आसपास पहुंच चुका है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वी और पश्चिमी राज्यों तक गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। जिसमें सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है, खासकर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों पर। ऐसे में स्थिति को देखते हुए कई राज्य सरकारों और जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जिसमें बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है और कुछ राज्यों में गर्मी की छुट्टियां भी समय से पहले घोषित कर दी गई हैं।
यूपी और गाजियाबाद में बदला स्कूल टाइम
Uttar Pradesh के कई जिलों में गर्मी का असर तेजी से बढ़ रहा है। खासतौर पर Ghaziabad में सुबह से ही तेज धूप और उमस महसूस की जा रही है। वहीं, इसी को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों के समय में बदलाव कर दिया है। अब स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक ही चलेंगे। इस फैसले का खास उद्देश्य बच्चों को दोपहर की तेज गर्मी और लू से बचाना है। छोटे बच्चों के लिए यह राहत भरा कदम है क्योंकि अब उन्हें कम तापमान में स्कूल जाना और घर लौटना होगा। अभिभावकों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।
दिल्ली-NCR में सख्त नियम और ‘वॉटर बेल’
Delhi NCR में भीषण गर्मी को देखते हुए स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए गए हैं। अब हर 45 से 60 मिनट में “वॉटर बेल” बजाई जा रही है, ताकि बच्चे समय-समय पर पानी पीते रहें और डिहाइड्रेशन से बच सकें। इसके अलावा सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक सभी आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। प्रार्थना सभा और खेलकूद भी फिलहाल बंद कर दिए गए हैं। स्कूलों में “बडी सिस्टम” लागू किया गया है, जिससे बच्चे एक-दूसरे का ध्यान रख सकें। साथ ही स्कूलों को नियमित हेल्थ रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। इन उपायों का मकसद बच्चों को गर्मी से सुरक्षित रखना है।
राजस्थान और झारखंड में भी बदलाव
Rajasthan के सीकर जिले में भी स्कूल टाइम बदल दिया गया है। यहां कक्षा 1 से 8 तक की क्लास अब सुबह 7:30 बजे से 11:30 बजे तक ही चल रही है। वहीं Jharkhand में भी नई टाइमिंग लागू की गई है।
- केजी से कक्षा 8: सुबह 7 बजे से 11:30 बजे तक
- कक्षा 9 से 12: सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक
ओडिशा में समय से पहले समर वेकेशन
Odisha ने सबसे बड़ा फैसला लेते हुए स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां पहले ही घोषित कर दी हैं। यहां 27 अप्रैल से ही समर वेकेशन शुरू कर दिया गया है। जिसमें सरकार का कहना है कि तापमान लगातार बढ़ रहा है और बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है। इसलिए पढ़ाई से ज्यादा उनकी सेहत को प्राथमिकता दी गई है।

अन्य राज्यों में भी बदले हालात
गर्मी का असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है। जिसमें कई अन्य राज्यों में भी स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है।
- Bihar (पटना): स्कूल सुबह से 11:30 बजे तक
- Maharashtra: स्कूल सुबह 7 बजे से 11:15 बजे तक
- Madhya Pradesh: कई जिलों में सुबह की शिफ्ट लागू
क्यों जरूरी हुआ यह फैसला?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे में लगातार बढ़ती गर्मी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। जिसमें खासकर छोटे बच्चों में शरीर का तापमान जल्दी बढ़ता है, जिससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और अत्यधिक थकावट जैसी समस्याएं तेजी से होती हैं। गर्मी के कारण चक्कर आना, सिर दर्द, उल्टी और कमजोरी भी आम हो जाती है। दोपहर के समय तापमान सबसे ज्यादा रहता है, जो बच्चों के लिए जोखिम भरा होता है। इसी वजह से स्कूलों का समय सुबह कर दिया गया है ताकि बच्चे तेज धूप और लू से बच सकें। यह फैसला उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है।
स्कूलों और अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह
भीषण गर्मी के इस दौर में सरकार के साथ-साथ स्कूल और अभिभावकों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। बच्चों को दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के लिए प्रेरित करें ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। उन्हें हल्के, सूती और ढीले कपड़े पहनाएं, जिससे शरीर ठंडा रहे। तेज धूप में बाहर जाने से बचाएं और जरूरत पड़ने पर टोपी या छाता का उपयोग जरूर कराएं। वहीं स्कूलों को भी जरूरी इंतजाम करने चाहिए। क्लासरूम में साफ पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था हो, फर्स्ट एड और मेडिकल सुविधा उपलब्ध रहे। शिक्षकों को बच्चों की सेहत पर नजर रखनी चाहिए ताकि किसी भी समस्या पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
अब आगे क्या हो सकता है?
ऐसे में अगर तापमान लगातार बढ़ता रहा, तो सरकारें और सख्त कदम उठा सकती हैं। जिसमें कई राज्यों में स्कूल पूरी तरह बंद करने, गर्मी की छुट्टियां बढ़ाने या फिर ऑनलाइन क्लास शुरू करने का फैसला लिया जा सकता है। इसके अलावा स्कूलों के समय में और कटौती भी संभव है। मौसम विभाग ने पहले ही चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में हीटवेव और तेज हो सकती है। ऐसे में बच्चों, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां अपनाने की जरूरत होगी।
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