Dhar Bhojshala News: मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में शुक्रवार का दिन इतिहास के स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद पहली बार ऐसा अवसर आया है जब हिंदू पक्ष पूरे अधिकार के साथ शुक्रवार को भी मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और भव्य महाआरती करेगा. करीब 721 साल बाद भोजशाला परिसर में शुक्रवार के दिन मां सरस्वती के जयकारे गूंजने वाले हैं, जिसे लेकर पूरे धार शहर में उत्साह, श्रद्धा और सुरक्षा का अभूतपूर्व माहौल दिखाई दे रहा है.
हाईकोर्ट के फैसले के बाद बदली तस्वीर
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले ने भोजशाला विवाद को नई दिशा दी है. अदालत ने हिंदू पक्ष को वर्ष के सभी 365 दिन पूजा-अर्चना की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि धार्मिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता. इस फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार भोजशाला में विशेष पूजा आयोजित की जा रही है. इस निर्णय को हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने ऐतिहासिक जीत बताया है. लंबे समय से चली आ रही धार्मिक और कानूनी लड़ाई के बाद यह अवसर हिंदू समाज के लिए बेहद भावुक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मां वाग्देवी की महाआरती की भव्य तैयारी
शुक्रवार सुबह ठीक 9 बजे भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी की महाआरती की जाएगी. इसके लिए विशेष मंच, पूजा सामग्री, फूल सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारियां कई दिनों से चल रही थीं. बड़ी संख्या में साधु-संत, धर्माचार्य और श्रद्धालु इस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच रहे हैं. भोजशाला परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी, भगवा ध्वज और तोरण द्वारों से सजाया गया है. स्थानीय लोगों ने पूरे शहर को उत्सव स्थल में बदल दिया है. जगह-जगह स्वागत मंच बनाए गए हैं और धार्मिक गीतों की गूंज सुनाई दे रही है.
धार शहर बना छावनी
इतिहासिक शुक्रवार को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पूरे धार शहर को सुरक्षा छावनी में बदल दिया गया है. पुलिस, RAF, CRPF और अन्य सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई है. प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी शुरू की है. ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी और कंट्रोल रूम से पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है.
निकाला गया भव्य फ्लैग मार्च
शुक्रवार से पहले धार शहर में प्रशासन की ओर से विशाल फ्लैग मार्च निकाला गया. इस मार्च में कलेक्टर राजीव रंजन मीना, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सुरक्षाबल शामिल रहे. फ्लैग मार्च शहर के संवेदनशील इलाकों से होकर गुजरा ताकि लोगों में विश्वास कायम रहे और कानून व्यवस्था बनी रहे. फ्लैग मार्च के दौरान देशभक्ति गीत बजाए गए और वाहनों पर तिरंगा झंडा लहराता दिखाई दिया. प्रशासन का संदेश साफ था कि किसी भी तरह की अफवाह या अशांति फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
भोजशाला का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
धार की भोजशाला को हिंदू समाज मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है. वर्षों से यह स्थल विवाद का केंद्र बना हुआ था. इतिहासकारों के अनुसार भोजशाला का निर्माण परमार राजा भोज के शासनकाल में हुआ था. यहां संस्कृत और शिक्षा का बड़ा केंद्र हुआ करता था. कई विद्वानों का मानना है कि यहां मां वाग्देवी की मूर्ति स्थापित थी और दूर-दूर से विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे. समय के साथ यह स्थल विवादों में घिर गया और पूजा-अर्चना के अधिकारों को लेकर अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई चली.
सोशल मीडिया पर दिखा जबरदस्त उत्साह
भोजशाला में शुक्रवार की महाआरती को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. हजारों लोग पोस्टर, वीडियो और धार्मिक संदेश साझा कर रहे हैं. कई हिंदू संगठनों ने लोगों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है. व्हाट्सऐप, फेसबुक और एक्स (पूर्व ट्विटर) पर भोजशाला से जुड़े हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं. श्रद्धालु इसे “ऐतिहासिक शुक्रवार” और “सनातन गौरव दिवस” के रूप में प्रचारित कर रहे हैं.
ज्योति मंदिर से निकलेगा विशाल जुलूस
कार्यक्रम के तहत दोपहर 12 बजे स्थानीय ज्योति मंदिर से विशाल धार्मिक यात्रा निकाली जाएगी. इस यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है. जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए भोजशाला पहुंचेगा. यात्रा में भजन मंडलियां, ढोल-नगाड़े, साधु-संत और विभिन्न धार्मिक संगठन शामिल होंगे. प्रशासन ने जुलूस मार्ग पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं.
प्रशासन ने जारी की गाइडलाइन
धार प्रशासन ने लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है. सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर नजर रखी जा रही है. पुलिस ने साफ कहा है कि किसी भी भड़काऊ पोस्ट या बयान पर तुरंत कार्रवाई होगी. इसके अलावा भोजशाला परिसर में प्रवेश के लिए सुरक्षा जांच अनिवार्य की गई है. बैरिकेडिंग, पार्किंग व्यवस्था और मेडिकल सहायता की भी विशेष तैयारी की गई है.
मुस्लिम पक्ष की प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने भी अपनी कानूनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. कुछ संगठनों ने फैसले पर आपत्ति जताई है, हालांकि प्रशासन लगातार दोनों समुदायों के बीच संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है. स्थानीय प्रशासन का कहना है कि सभी धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाएगा और कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा.
श्रद्धालुओं में भावुक माहौल
भोजशाला पहुंच रहे श्रद्धालुओं में खासा भावुक माहौल देखने को मिल रहा है. कई लोगों ने कहा कि वे वर्षों से इस दिन का इंतजार कर रहे थे। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है. कई महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कलश यात्रा की तैयारी करती दिखीं, जबकि युवाओं में भी खास उत्साह नजर आया.
राजनीतिक हलकों में भी चर्चा
भोजशाला का मुद्दा हमेशा राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील रहा है। हाईकोर्ट के फैसले और शुक्रवार की महाआरती को लेकर राजनीतिक दलों की नजर भी इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है. जहां कुछ नेताओं ने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण बताया, वहीं विपक्ष ने प्रशासन से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है.
सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी
खुफिया एजेंसियां भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं. पुलिस ने आसपास के जिलों से अतिरिक्त बल बुलाया है. शहर के प्रवेश मार्गों पर चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और प्रमुख बाजारों में भी पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके.
भोजशाला विवाद का लंबा इतिहास
भोजशाला विवाद कई दशकों से अदालतों और प्रशासनिक फैसलों के बीच उलझा रहा है. पहले यहां शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति दी जाती थी जबकि मंगलवार को हिंदू पक्ष पूजा करता था. अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है. यही कारण है कि इस शुक्रवार को ऐतिहासिक और निर्णायक माना जा रहा है.
पूरे देश की नजर धार पर
धार भोजशाला में हो रहे इस आयोजन पर सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश की नजर टिकी हुई है. धार्मिक संगठनों, इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह विषय चर्चा का केंद्र बना हुआ है. भोजशाला का यह ऐतिहासिक शुक्रवार आने वाले समय में देश की सांस्कृतिक और धार्मिक राजनीति पर भी असर डाल सकता है.
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