Falta Election Results: पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर हुए दोबारा मतदान की मतगणना ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है. रविवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई वोटों की गिनती में भारतीय जनता पार्टी ने शुरुआती रुझानों से ही बढ़त बनानी शुरू कर दी. तीसरे राउंड की मतगणना पूरी होने तक भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा 30 हजार से ज्यादा वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल कर चुके थे. यह सीट लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है. ऐसे में भाजपा की यह बढ़त राज्य की राजनीति में बड़ा संकेत मानी जा रही है. खास बात यह भी है कि चुनाव आयोग ने पहले हुए मतदान को ईवीएम से छेड़छाड़ और अनियमितताओं की शिकायतों के बाद रद्द कर दिया था, जिसके बाद 21 मई को दोबारा मतदान कराया गया.
क्यों चर्चा में है फलता सीट?
फलता विधानसभा सीट इस बार पश्चिम बंगाल की सबसे चर्चित सीटों में शामिल रही. 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई बूथों से हिंसा, ईवीएम में गड़बड़ी और मतदान प्रभावित होने की शिकायतें सामने आई थीं. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि मतदाताओं को बूथ तक पहुंचने से रोका गया और कई जगह चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई. इन शिकायतों को गंभीर मानते हुए चुनाव आयोग ने सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया. इसके बाद 21 मई को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच री-पोलिंग कराई गई, जिसमें 87 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज हुआ. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में मतदान होना इस सीट पर जनता की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता और मुकाबले की गंभीरता को दर्शाता है.
तीसरे राउंड में भाजपा की बंपर बढ़त
मतगणना शुरू होने के कुछ ही घंटों में भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने मजबूत बढ़त बना ली. तीसरे राउंड के बाद चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा 30 हजार से ज्यादा वोटों से आगे चल रही थी. इस बढ़त ने तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि 2021 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट पर टीएमसी ने 40 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी. भाजपा कार्यकर्ताओं ने शुरुआती रुझानों के बाद ही जश्न मनाना शुरू कर दिया. कोलकाता और दक्षिण 24 परगना के कई इलाकों में भाजपा समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं और पार्टी के झंडे लहराए.
TMC उम्मीदवार ने पहले ही छोड़ा था मैदान
फलता सीट का चुनाव इसलिए भी खास बन गया क्योंकि तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतदान से कुछ दिन पहले ही चुनाव नहीं लड़ने का एलान कर दिया था. हालांकि उनका नाम ईवीएम में बना रहा और चुनाव प्रक्रिया जारी रही. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उम्मीदवार के पीछे हटने का असर मतदाताओं के रुझान पर पड़ा. इससे विपक्ष को चुनाव में बढ़त बनाने का मौका मिला. हालांकि टीएमसी ने आधिकारिक तौर पर चुनाव से दूरी नहीं बनाई और पार्टी कार्यकर्ता मैदान में सक्रिय रहे. पार्टी नेताओं ने दावा किया कि अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर बदल सकती है.
दिलीप घोष का बड़ा बयान
पश्चिम बंगाल भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री दिलीप घोष ने मतगणना के दौरान बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि फलता का नतीजा पहले ही साफ हो चुका है और इस सीट पर कोई मुकाबला नहीं बचा है. दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस के नेता चुनाव मैदान से पीछे हट चुके हैं और जनता बदलाव चाहती है. उन्होंने कहा कि अंतिम नतीजों में भाजपा की ऐतिहासिक जीत सामने आएगी. भाजपा नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं बल्कि बंगाल की राजनीति में बदलाव का संकेत है.
CPM और कांग्रेस भी मैदान में
फलता सीट पर मुख्य मुकाबला भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच माना जा रहा था, लेकिन कांग्रेस और सीपीआई(एम) ने भी इस चुनाव में पूरी ताकत झोंकी थी. सीपीआई(एम) उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी शुरुआती राउंड में भाजपा से काफी पीछे चल रहे थे. कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल रज्जाक मोल्ला भी मुकाबले में निर्णायक स्थिति में नजर नहीं आए. विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी वोटों के बंटवारे का सीधा फायदा भाजपा को मिला.
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
री-पोलिंग और मतगणना दोनों के दौरान चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए. सभी बूथों पर केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी. कई संवेदनशील इलाकों में ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई. मतगणना केंद्र के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए 24 घंटे निगरानी रखी गई. चुनाव आयोग ने कहा कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए.
2021 में टीएमसी ने दर्ज की थी बड़ी जीत
फलता विधानसभा सीट पर 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार शंकर कुमार नास्कर ने भाजपा को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. उस समय यह सीट टीएमसी का मजबूत गढ़ मानी जाती थी। लेकिन इस बार हालात अलग नजर आए. भाजपा ने ग्रामीण इलाकों में भी अपनी पकड़ मजबूत की और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफलता हासिल की. विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने दक्षिण बंगाल में तेजी से संगठन मजबूत किया है, जिसका असर अब चुनाव परिणामों में दिखाई देने लगा है.
क्या बंगाल में बदल रहा है राजनीतिक माहौल?
फलता सीट के शुरुआती रुझानों ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. भाजपा इसे राज्य में अपनी बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत बता रही है, जबकि टीएमसी अभी अंतिम नतीजों का इंतजार करने की बात कह रही है. राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार अगर भाजपा इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज करती है तो यह ममता बनर्जी सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संदेश माना जाएगा. बीजेपी लगातार बंगाल में कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के मुद्दे उठा रही है. वहीं टीएमसी का कहना है कि भाजपा सिर्फ राजनीतिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है.
रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई राजनीतिक दिलचस्पी
फलता में दोबारा हुए मतदान में 88 प्रतिशत के करीब वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले चुनावों से भी ज्यादा रही. इतने बड़े मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों की चिंता और उत्सुकता दोनों बढ़ा दी. विशेषज्ञों का मानना है कि भारी मतदान आमतौर पर बदलाव के संकेत के रूप में देखा जाता है. हालांकि अंतिम नतीजे आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी.
भाजपा कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल
तीसरे राउंड के बाद भाजपा की बड़ी बढ़त सामने आते ही पार्टी कार्यालयों में जश्न शुरू हो गया. समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जीत का उत्सव मनाना शुरू कर दिया. देबांग्शु पांडा ने भी मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा कि जनता ने विकास और बदलाव के पक्ष में वोट दिया है. उन्होंने कहा कि फलता की जनता ने डर और हिंसा की राजनीति को नकार दिया.
अंतिम नतीजों पर टिकी नजरें
फलता सीट पर कुल 21 राउंड की मतगणना होनी है. शुरुआती रुझानों में भाजपा की बढ़त मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन सभी की नजरें अंतिम नतीजों पर टिकी हुई हैं. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट का परिणाम आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. अगर भाजपा यहां बड़ी जीत दर्ज करती है तो यह राज्य में उसके मनोबल को और मजबूत करेगा. वहीं टीएमसी के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का बड़ा कारण बन सकता है.
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