GOBARdhan Scheme 2026: मोदी कैबिनेट ने आज यानी 8 अगस्तर 2026 गुरुवार को देश में स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की शुरुआत कर दी है। दरअसल, मोदी सरकार ने गोबरधन योजना (GOBAR-DHAN Scheme) को मंजूरी दे दी है। सरकार की इस सरकारी स्कीम का मुख्य उद्देश्य गोबर, कृषि अवशेष और दूसरे जैविक कचरे को बायोगैस और कंप्रेस्ड बायोगैस (Biogas and Compressed Biogas) यानी CBG में आसान तरीकों से बदलना है और साथ ही भारत में CBG उत्पादन को करीब 10 गुना तक बढ़ाना है।
बता दें कि भारत सरकार ने इस बेहतरीन कृषि स्कीम का कुल खर्च 23,731 करोड़ रुपये तक तय किया है। ऐसे में आइए गोबरधन योजना (GOBAR-DHAN Scheme) से जुड़ी हर एक जानकारी को यहां विस्तार से जानते हैं?
गोबरधन योजना का लाभ 2035-36 तक मिलेगा
केंद्र सरकार के मुताबिक, GOBARdhan योजना, जिसका पूरा नाम Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan है, इस स्कीम को राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत योजना के तौर पर ही लागू किया जाएगा। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2035-36 तक सफलतापूर्वक चलेगी। इस स्कीम के तहत खेती के दौरान निकलने वाले अवशेष, पशुओं का गोबर, शुगर मिलों से निकलने वाला प्रेसमड, नगर निकायों का जैविक कचरा और अन्य बायोमास को उपयोगी संसाधन में बदला जाएगा।
गोबरधन योजना क्या है और क्यों है खास?
गोबरधन योजना (GOBAR-DHAN Scheme) का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि यह सिर्फ कचरे के बोझ ही नहीं खत्म करती है, बल्कि कमाई और ऊर्जा का एक बेहतरीन जरिया भी बनकर उभरने में मददगार है। बताया जा रहा है कि इस स्कीम की मदद से जैविक कचरे से CBG और जैविक खाद तैयार की जाएगी। इससे एक तरफ गांवों में कचरा प्रबंधन बेहतर होगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और दूसरे लोगों के लिए कमाई के नए अवसर मिलेंगे। इसके अलावा यह भारत में घरेलू CBG उत्पादन में करीब 10 गुना बढ़ोतरी कर सकती है। इससे प्राकृतिक गैस की बढ़ती जरूरत को घरेलू स्तर पर पूरा करने में मदद मिलेगी और आयातित जीवाश्म ईंधन ( fossil fuels) पर निर्भरता भी कम होगी।

CBG प्लांट लगाने वालों को क्या मिलेगा?
गोबरधन योजना में CBG उत्पादन को बढ़ाने के लिए कई तरह की सुविधाओं को जोड़ा गया है, ताकि किसानों तक सही लाभ पहुंच सके। इसी क्रम में भारत सरकार के द्वारा CBG की खरीद को लेकर भी बाजार और मांग को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसके अलावा स्थिर कीमत, पूंजीगत सहायता, पाइपलाइन कनेक्टिविटी और लोन की सुविधा को बेहतर बनाया जाएगा।
योजना के तहत पात्र नए CBG प्रोजेक्ट्स को स्थापित क्षमता के आधार पर प्रति टन प्रतिदिन 2 करोड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता मिल सकती है। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी व्यवस्था (Credit Guarantee Mechanism) भी मिलेगी, जिससे वह आसानी से कर्ज लेकर आपने कार्य को पूरा कर सके। CBG की मांग को बढ़ाने के लिए CNG और घरेलू PNG क्षेत्र में CBG ऑब्लिगेशन भी तय होगी। यह वित्त वर्ष 2026-27 में 3 प्रतिशत, 2027-28 में 4 प्रतिशत और 2028-29 से 5 प्रतिशत तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों और गांवों को क्या फायदा होगा?
वहीं, यह भी बताया जा रहा है कि गोबरधन योजना का सीधा फायदा ग्रामीण लोगों को मिलेगा। क्योंकि सरकार ने इसमें कृषि अवशेष और पशुओं के गोबर को उपयोगी को बढ़ावा देने के लिए किसानों की जरूरतों का विशेष तौर पर ध्यान रखा है।
- CBG प्लांट के लिए कच्चे माल की सप्लाई, परिवहन, प्लांट संचालन और जैविक खाद के उत्पादन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- इस योजना से किसानों की आय भी बढ़ेगी।
- इससे पराली और अन्य कृषि अवशेषों के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलेगी।
- जैविक कचरे से ईंधन और खाद तैयार होने से प्रदूषण कम होगा।
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाने में भी मदद मिल सकती है।
गुवाहाटी-तेजपुर हाईवे को भी मिली मंजूरी
वही, मोदी कैबिनेट (Modi Cabinet) में आज सिर्फ गोबरधन योजना को ही मंजूरी मिली, बल्कि असम में बाईहाटा चारियाली से तेजपुर तक 135.87 किलोमीटर लंबे चार लेन वाले NH-15 कॉरिडोर को भी मंजूरी दे दी गई है। इस विशेष परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,970.20 करोड़ रुपये है। इसे BOT टोल मॉडल पर विकास का काम तेजी से किया जाएगा।
इस हाईवे में 5 बड़े बाईपास बनाए जाएंगे, जिससे बाईहाटा चारियाली, सिपाझार, खरुपेटिया, डेकियाजुली और तेजपुर जैसे इलाकों में ट्रैफिक का दबाव कम होगा। इसके अलावा तेजपुर बाईपास पर भारतीय वायुसेना के साथ मिलकर 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (Emergency Landing Facility) भी तैयार किया जाएगा।
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