Hamid Ansari: पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के एक बयान को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। बता दें (Hamid Ansari Statement 2026) को लेकर बीजेपी (BJP) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) नेताओं ने सवाल उठाए हैं। अंसारी ने एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के एक पुराने कथन का जिक्र किया था। उन्होंने यह संदर्भ एजी नूरानी की किताब The RSS: A Menace to India में दर्ज जानकारी के आधार पर दिया।
ऐसे में अंसारी के बयान के बाद बीजेपी नेता शहनवाज हुसैन, करुणासागर और VHP प्रवक्ता विनोद बंसल ने प्रतिक्रिया दी। वहीं, अंसारी के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने नेहरू की पुरानी टिप्पणी को ऐतिहासिक संदर्भ में रखा था। आइए यहां जानें खबर को लेकर पूरी जानकारी
क्या कहा था हामिद अंसारी ने?
अंसारी ने अपने भाषण में नूरानी की किताब और उसके परिचय का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें विदेश मंत्रालय के अधिकारियों की एक बैठक में नेहरू द्वारा कही गई बात का जिक्र है। यह रिकॉर्ड तत्कालीन विदेश सचिव जगत सिंह गुंडेविया से जोड़ा गया है।
अंसारी के अनुसार, इस पुराने संदर्भ में नेहरू ने भारत के लिए खतरे की चर्चा करते हुए कम्युनिज्म के बजाय हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को चिंता का विषय बताया था। यह टिप्पणी किस ऐतिहासिक संदर्भ में कही गई थी, इसका आधार नूरानी की किताब में दिया गया विवरण है। साथ ही, अपने भाषण में अंसारी ने सिर्फ इस पुराने कथन का जिक्र नहीं किया, बल्कि नागरिक राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीच अंतर पर भी बात की। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में ऐसी प्रवृत्तियां सामने आई हैं, जो नागरिक राष्ट्रवाद की स्थापित अवधारणा को चुनौती देती हैं और चुनावी बहुमत को धार्मिक बहुमत के रूप में पेश करने की कोशिश करती हैं।

VHP ने किया पलटवार
अंसारी के बयान के बाद विश्व हिंदू परिषद के नेता विनोद बंसल ने उनकी आलोचना की है। 20 सितंबर को बंसल ने कहा कि भारत ने अंसारी को महत्वपूर्ण पद और सम्मान दिया और उन्हें ऐसे बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने अंसारी के बयान को बहुसंख्यक हिंदू समाज से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
बंसल ने यह भी आरोप लगाया कि अंसारी के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कुछ ऐसे संगठनों के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, जिन्हें लेकर विवाद रहा है। ये आरोप बंसल की ओर से लगाए गए हैं और इसी आधार पर उन्होंने अंसारी के सार्वजनिक जीवन को भी चर्चा में लाया।
BJP नेताओं ने भी जताई आपत्ति
अंसारी के बयान पर बीजेपी नेताओं की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता शहनवाज हुसैन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि अंसारी को अपने बयान पर माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने देश में शांति और सामाजिक सौहार्द का हवाला देते हुए ऐसे बयानों से बचने की बात कही।
बीजेपी नेता करुणासागर ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चर्चा कट्टरता और उग्रवाद की है तो अलग-अलग तरह के उग्रवाद और आतंकवाद की समान रूप से निंदा होनी चाहिए। इस तरह बीजेपी नेताओं ने अंसारी के बयान के संदर्भ और उसके राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाए।
इमाम संगठन की ओर से भी प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन (All India Imam Organization) से जुड़े उमेर अहमद इलियासी ने भी अंसारी के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणियां समाज के माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। इलियासी ने अंसारी से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के मुस्लिम समुदाय को लेकर दिए गए कुछ बयानों का भी उल्लेख करने की बात कही।
पुराने बयान से आज की राजनीति तक पहुंचा विवाद
पूरे विवाद का केंद्र अंसारी का वह भाषण है, जिसमें उन्होंने एजी नूरानी की किताब के जरिए नेहरू से जुड़ी एक पुरानी टिप्पणी का संदर्भ दिया। वहीं, बीजेपी और VHP नेताओं ने इस संदर्भ को मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
अंसारी के भाषण में नागरिक राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, धार्मिक पहचान और राजनीतिक बहुमत जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई थी। दूसरी ओर, उनके आलोचकों ने बहुसंख्यक समाज और कथित कट्टरता से जुड़े मुद्दों को सामने रखा है। इस तरह एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर में दिया गया एक ऐतिहासिक संदर्भ अब मौजूदा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। एक तरफ अंसारी के बयान को नूरानी की किताब और नेहरू से जुड़े पुराने रिकॉर्ड के संदर्भ में देखा जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ बीजेपी और VHP नेता इसे लेकर अलग सवाल उठा रहे हैं।
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