प्राकृतिक गैस: भारत के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजार से एक राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक गैस की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था, जिससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देश को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण गैस की कीमतें तेजी से बढ़ गई थीं और सप्लाई भी प्रभावित हुई थी। लेकिन अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। जिससे ग्लोबल मार्केट में गैस की कीमतों में करीब 50 फीसदी तक गिरावट आई है, जिससे भारत को बड़ा फायदा मिला है।
जानकारी के लिए बता दें कि इस गिरावट का लाभ उठाते हुए भारत ने एक बार फिर सस्ती दरों पर प्राकृतिक गैस की खरीदारी शुरू कर दी है। इससे न केवल एलपीजी संकट से राहत मिलने की उम्मीद है, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता भी आ सकती है। सरकार और तेल-गैस कंपनियां इस मौके का फायदा उठाकर भविष्य के लिए भंडारण बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही हैं, ताकि आगे किसी भी संकट का सामना आसानी से किया जा सके।
गैस की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई थी। इसका असर सीधे तौर पर प्राकृतिक गैस की कीमतों पर पड़ा और कीमतें अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गईं। एक समय ऐसा भी आया जब गैस की कीमत 25 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (MMBTU) तक पहुंच गई थी। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। हाल ही में गैस की कीमतों में करीब 50 फीसदी की गिरावट आई है, जिससे यह लगभग 16 डॉलर प्रति MMBTU के स्तर पर आ गई है। यह गिरावट भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए राहत लेकर आई है।

भारत ने बढ़ाई गैस की खरीदारी
कीमतों में कमी आते ही भारत ने तुरंत रणनीति बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार से गैस खरीदारी बढ़ा दी है। देश की प्रमुख सरकारी कंपनियों जैसे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, गेल इंडिया लिमिटेड और गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने अप्रैल से जून की डिलीवरी के लिए गैस खरीदी है।
ट्रेडर्स के मुताबिक, यह सौदे 15 अप्रैल को बंद हुए ट्रेड के दौरान लगभग 16 डॉलर प्रति MMBTU के भाव पर किए गए हैं। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि कुछ समय पहले तक ऊंची कीमतों के चलते भारत ने स्पॉट मार्केट से खरीदारी लगभग रोक दी थी।
क्यों पैदा हुआ गैस संकट?
गैस संकट के पीछे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष है। इस तनाव का असर पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों पर पड़ा है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गया है।
- कतर में हमलों के कारण दुनिया का सबसे बड़ा एलएनजी प्लांट प्रभावित हुआ।
- वैश्विक गैस सप्लाई का करीब 20% हिस्सा प्रभावित हुआ।
भारत की आयात पर निर्भरता
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। जिससे देश में गैस की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए।
- भारत अपनी कुल गैस जरूरत का लगभग 60% आयात करता है।
- साल 2024 में गैस आयात करीब 35 हजार क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया।
- भारत मुख्य रूप से कतर, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका से गैस खरीदता है।
कीमत गिरते ही बदली रणनीति
बता दें जब गैस की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं, तब भारतीय कंपनियों ने स्पॉट मार्केट से दूरी बना ली थी और कई टेंडर कैंसिल कर दिए थे, लेकिन जैसे ही कीमतों में गिरावट आई, कंपनियों ने फिर से खरीदारी शुरू कर दी है। अब ऐसे में यह रणनीति भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है।
- कम कीमत पर अधिक गैस खरीदी जा सकती है।
- भविष्य के लिए भंडारण बढ़ाया जा सकता है।
- एलपीजी और ऊर्जा संकट से राहत मिल सकती है।
एलपीजी संकट से कैसे मिलेगी राहत?
प्राकृतिक गैस की उपलब्धता बढ़ने से एलपीजी सप्लाई पर भी सकारात्मक असर पड़ता है। भारत में घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए एलपीजी की मांग काफी अधिक है।
- घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
- उद्योगों को सस्ती ऊर्जा मिल सकती है।
- बिजली उत्पादन की लागत घट सकती है।
अब आगे क्या है चुनौती?
ऐसे में फिलहाल कीमतों में गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आई है, लेकिन वैश्विक स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
- पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ सकता है।
- सप्लाई चेन फिर प्रभावित हो सकती है।
- कीमतों में दोबारा उछाल आ सकता है।
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