B. Nagendra Resignation: कर्नाटक की राजनीति एक नया सियासी माहौल गरमा गया है। दरअसल, एक बार फिर महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से जुड़े कथित घोटाले को लेकर सियासी हलचल देखने को मिल रही है। ऐसे में अब कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार (Karnataka Sarkar) में मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। नागेंद्र को करीब 25 दिन पहले ही राज्य मंत्रिमंडल में दोबारा शामिल किया गया था। उनके इस फैसले के बाद कांग्रेस सरकार पर विपक्ष का दबाव पहले से भी काफी अधिक बढ़ गया है।
बता दें कि इस इस्तीफे की घोषणा के बाद बी. नागेंद्र (B. Nagendra) ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। इसपर उन्होंने कहा कि वाल्मीकि निगम से जुड़े किसी भी लेनदेन में उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।
नागेंद्र को राजनीतिक तौर पर किया बदनाम
वहीं, नागेंद्र ने दावा किया है कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगातार झूठ फैलाया जा रहा है और राजनीतिक तौर पर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
बी. नागेंद्र ने इस दौरान बैंकिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। जहां उन्होंने कहा कि वाल्मीकि निगम से जुड़े पूरे मामले में बैंकों की भूमिका भी सामने आई है। अगर इस मामले में बैंकों की संलिप्तता है तो इसकी जिम्मेदारी को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय वित्त मंत्री (Union Finance Minister) से भी सवाल पूछा जाना चाहिए। नागेंद्र ने कहा कि कर्नाटक की जनता पूरे मामले को देख रही है और समय आने पर सच्चाई सामने आएगी।
कैसे सामने आया वाल्मीकि निगम घोटाला?
यह पूरा मामला मई 2024 में सामने आया था। कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के लेखा अधीक्षक पी. चंद्रशेखरन की आत्महत्या के बाद निगम में वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया। इस जांच में करीब 89.63 करोड़ रुपये के कथित अनधिकृत लेनदेन का पता चला था। इस मामले ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार (Karnataka’s Congress Government) को राजनीतिक तौर पर मुश्किल स्थिति में ला दिया था।
उस समय बी. नागेंद्र राज्य के जनजातीय कल्याण मंत्री थे। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने जून 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद इस मामले को लेकर विपक्षी दल लगातार कांग्रेस सरकार (Congress Government) पर हमलावर रहे।
3 अगस्त को फिर मंत्रिमंडल में हुई थी वापसी
देखा जाए तो करीब दो साल बाद बी. नागेंद्र की सरकार (B. Nagendra’s Government) में दोबारा वापसी हुई। 3 अगस्त 2026 को उन्हें योजना और सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी देते हुए कर्नाटक मंत्रिमंडल (Karnataka Cabinet) में शामिल किया गया था। उनकी वापसी के बाद बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) यानी जेडी(एस) ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया।
विपक्षी दलों का कहना था कि जिस नेता का नाम इतने बड़े वित्तीय विवाद से जुड़ा रहा है, उन्हें दोबारा मंत्री बनाना सरकार के फैसले पर सवाल खड़े करता है। बीजेपी और जेडी(एस) ने बी. नागेंद्र के इस्तीफे (B. Nagendra’s Resignation) की मांग को लेकर विधानसभा के अंदर और बाहर विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया।
विपक्ष ने पदयात्रा का भी किया ऐलान
इस राजनीति मामले को लेकर बीजेपी और जेडी(एस) ने सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। दोनों विपक्षी दलों ने 1 सितंबर से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। इस दौरान वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित घोटाले और बी. नागेंद्र की मंत्रिमंडल (B. Nagendra’s Cabinet) में वापसी को प्रमुख मुद्दा है।
ऐसे में अब लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच अब बी. नागेंद्र ने खुद इस्तीफा देने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि वह मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री के साथ चर्चा करने के बाद वह प्रेस कॉन्फ्रेंस (Press Conference) कर के अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा करेंगे।
नागेंद्र के इस्तीफे से कर्नाटक की कांग्रेस सरकार (Karnataka’s Congress Government) के सामने एक बार फिर वाल्मीकि निगम मामले को लेकर राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। लेकिन मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया और साथ ही उन्होंने दावा किया है कि उन्हें हमेशा से राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया गया है।
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