Trump PM Modi Press Conference: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की एक मुलाकात से जुड़ा ऐसा किस्सा बताया है, जिसने दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। गोर के मुताबिक, जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और ट्रंप की द्विपक्षीय बैठक से पहले भारत की ओर से एक खास अनुरोध किया गया था। भारत चाहता था कि मीडिया को बैठक की शुरुआत में मौजूद रहने दिया जाए, लेकिन पत्रकारों के सवाल न लिए जाएं।
मिली जानकारी के अनुसार गोर ने यह खुलासा इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम 2026 में किया। उनके मुताबिक, बैठक से पहले वह राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मंच के पीछे मौजूद थे। इसी दौरान ट्रंप ने उनसे पूछा कि भारतीय पक्ष बैठक में किन मुद्दों को उठाने वाला है और उसकी कोई विशेष मांग है या नहीं।
भारत ने की थी ‘नो क्वेश्चन’ की मांग
सर्जियो गोर ने बताया कि उन्होंने ट्रंप को भारतीय विदेश मंत्रालय की इच्छा के बारे में जानकारी दी थी। भारत की तरफ से कहा गया था कि मीडिया को कमरे में आने की अनुमति दी जाए, ताकि बैठक की तस्वीरें और शुरुआती बयान रिकॉर्ड किए जा सकें, लेकिन पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस या सवाल-जवाब का दौर न हो।
गोर के अनुसार, ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। इसके बाद दोनों नेता बैठक के लिए पहुंचे। कमरे में बड़ी संख्या में कैमरे मौजूद थे। जिसमें पीएम मोदी और ट्रंप ने शुरुआती टिप्पणी की और दोनों देशों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
ट्रंप ने अचानक कहा- ‘Any questions?’
सर्जियो गोर के मुताबिक, असली दिलचस्प मोड़ उस वक्त आया जब दोनों नेताओं की शुरुआती टिप्पणियां खत्म हो गईं। ट्रंप ने कैमरों की तरफ देखा और अचानक पत्रकारों से सवाल पूछने के लिए कहा।
गोर ने बताया कि ट्रंप के इस कदम के बाद मीडिया ने सवाल करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वह बातचीत एक लंबी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बदल गई। अमेरिकी राजदूत के अनुसार, यह सवाल-जवाब करीब 45 मिनट तक चला।
कई अहम मुद्दों पर हुई बातचीत
इस दौरान भारत-अमेरिका संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। बैठक का संदर्भ ऐसे समय का था जब दोनों देशों के बीच व्यापार, रणनीतिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय लगातार चर्चा में हैं।
गोर के इस बयान के मुताबिक, मीडिया के सवालों से बचने की भारत की शुरुआती योजना के बावजूद ट्रंप ने पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका दे दिया। इससे बैठक का स्वरूप काफी हद तक बदल गया और दोनों नेताओं से सीधे सवाल किए गए।

भारत सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
अमेरिकी राजदूत का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका अपने रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। गोर ने हाल में दोनों देशों के संबंधों को महत्वपूर्ण बताते हुए व्यापार समझौते की दिशा में भी प्रगति का संकेत दिया है। बता दें फिलहाल सर्जियो गोर के इस दावे पर भारत सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए ‘नो क्वेश्चन’ की शर्त और ट्रंप के उसे बाद में भूल जाने से जुड़ा यह पूरा घटनाक्रम फिलहाल अमेरिकी राजदूत के बयान पर आधारित है।
भारत-अमेरिका रिश्तों पर भी गोर ने की बात
इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी सकारात्मक बात कही। उन्होंने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। गोर ने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ट्रंप के उस कथित अचानक फैसले की हो रही है, जब उन्होंने पहले भारत की ‘नो क्वेश्चन’ वाली इच्छा पर सहमति जताई और फिर बैठक के अंत में खुद ही पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका दे दिया। सर्जियो गोर के मुताबिक, इसी एक फैसले ने निर्धारित कार्यक्रम को बदल दिया और बैठक करीब 45 मिनट तक मीडिया सवालों के बीच चलती रही।
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