Rahul Gandhi News: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद कहा कि विपक्ष ने चुनाव में कथित धांधली और वोट चोरी (Vote Chori) से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने उनकी बातों का खंडन नहीं किया।
वहीं, विपक्षी सांसद अब सोमवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जाकर अपना ज्ञापन सौंपने की तैयारी में हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR पर रोक और मतदाता सूची में नाम बहाल करने समेत चार प्रमुख मांगें रखी हैं। ऐसे में यहां पढ़ें पूरी खबर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले राहुल गांधी और ममता बनर्जी
देश में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच शुक्रवार रात विपक्षी दलों के 10 सांसदों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी नेता शामिल थे।
बैठक के दौरान विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका जैसे मुद्दे उठाए। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि राष्ट्रपति चुनाव व्यवस्था को स्वतंत्र और निष्पक्ष बताते हुए विपक्ष के आरोपों से असहमति जताएंगी। हालांकि, उनके मुताबिक बैठक में ऐसा नहीं हुआ।
राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रपति ने उनकी बातों का खंडन नहीं किया और उनसे चुनाव में कथित धांधली के सबूत देने को कहा। उन्होंने इस बातचीत को अपने लिए हैरान करने वाला बताया।
‘राष्ट्रपति ने हमारी बात मानी’, राहुल गांधी का बयान
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष ने ज्ञापन के जरिए चुनाव प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर विपक्ष को आपत्ति है।
राहुल गांधी के अनुसार, राष्ट्रपति ने विपक्ष के आरोपों पर न तो उनका खंडन किया और न ही इस मुद्दे पर बहस की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने उनसे चुनाव में कथित धांधली के सबूत पेश करने को कहा है। साथ ही, कांग्रेस नेता ने दावा किया कि चुनावों में गड़बड़ी को लेकर विपक्ष पहले भी कई बार सवाल उठा चुका है। उन्होंने विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि इन मुद्दों की जांच होनी चाहिए। हालांकि, राहुल गांधी के बयान को राष्ट्रपति की ओर से विपक्ष के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। राष्ट्रपति की ओर से इन आरोपों को स्वीकार करने की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इसे राहुल गांधी का दावा ही समझना उचित है।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाएगा विपक्ष
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने बताया कि विपक्षी सांसद सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाकर अपना ज्ञापन सौंपेंगे। विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इन मुद्दों पर कार्रवाई जरूरी है।
विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदान की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं।
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट में किन मांगों और दस्तावेजों के साथ पहुंचता है। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित संस्थाएं इन आरोपों और मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।

विपक्ष के ज्ञापन में क्या हैं चार प्रमुख मांगें?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपे गए ज्ञापन में विपक्ष ने चुनाव सुधारों और कथित अनियमितताओं को लेकर चार प्रमुख मांगें रखी हैं।
1. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग: विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही, उसने वर्ष 2023 में बनाए गए उस कानून को रद्द करने की मांग भी की है, जिसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों से जुड़े मामलों में कानूनी संरक्षण मिलता है। इस मांग का उद्देश्य चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर विपक्ष की आपत्तियों को उठाना है।
2. SIR पर तुरंत रोक लगाने की मांग: विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को तत्काल रोकने की मांग की है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि मतदाता सूची से करीब 13.30 करोड़ लोगों के नाम गैर-कानूनी तरीके से हटाए गए हैं। विपक्ष ने ऐसे सभी मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है। यह आंकड़ा विपक्ष की ओर से ज्ञापन में किया गया दावा है। इसकी पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और प्रक्रियाओं की जांच जरूरी है।
3. पेपर बैलेट से चुनाव कराने की मांग: विपक्ष ने सभी चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय फिर से पेपर बैलेट का इस्तेमाल शुरू करने की मांग की है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि इससे मतदान प्रक्रिया को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, पेपर बैलेट से चुनाव कराने की मांग पर राजनीतिक दलों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े पक्षों के बीच मतभेद रहे हैं।
4. पिछले विधानसभा चुनाव रद्द करने की मांग: विपक्ष ने पिछले दो वर्षों में हुए उन सभी विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग की है, जिनमें उसके अनुसार वोट चोरी के ठोस सबूत सामने आए हैं। विपक्ष का कहना है कि जिन चुनावों में गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस मांग पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह संबंधित चुनावों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
चुनाव प्रक्रिया पर बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद विपक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस समेत विपक्षी दल मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
दूसरी ओर, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक प्रतिक्रियाओं और कानूनी प्रक्रिया को देखना जरूरी है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर रहेगी।
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