Ram Nath Kovind Autobiography: पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के जीवन और सार्वजनिक सफर पर आधारित उनकी आत्मकथा को लेकर आज का दिन खास है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में रामनाथ कोविंद की किताब ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ का विमोचन करेंगे। इस मौके पर प्रधानमंत्री सभा को संबोधित भी करेंगे। आपके दिए कार्यक्रम विवरण के अनुसार, समारोह बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित होगा। किताब में कोविंद ने अपने बचपन से लेकर सार्वजनिक जीवन और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की यात्रा को अपने नजरिए से पेश किया है। किताब के प्रकाशक के अनुसार, यह लगभग 400 पन्नों की पुस्तक है और इसका प्रकाशन Rupa Publications ने किया है। पुस्तक का ISBN 9789353525378 है।
गांव से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
रामनाथ कोविंद की जिंदगी की कहानी काफी साधारण शुरुआत से शुरू होती है। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले के परौंख गांव में हुआ था। यहीं से उनकी शुरुआती जिंदगी और शिक्षा की यात्रा शुरू हुई। बाद में उन्होंने कानून की पढ़ाई की और दिल्ली में वकालत भी की। इसके बाद उनका सार्वजनिक जीवन आगे बढ़ा और वे राज्यसभा के सदस्य बने। वह बिहार के राज्यपाल भी रहे और फिर वर्ष 2017 में भारत के 14वें राष्ट्रपति चुने गए। किताब में इसी लंबे सफर को विस्तार से बताया गया है। प्रकाशक के विवरण के अनुसार, कोविंद ने अपने बचपन, शुरुआती राजनीतिक आकांक्षाओं, राज्यसभा के अनुभव, बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल और राष्ट्रपति बनने तक की यात्रा को इसमें शामिल किया है।
राष्ट्रपति भवन के अनुभव भी होंगे खास
आत्मकथा की सबसे खास बात यह है कि इसमें सिर्फ रामनाथ कोविंद की व्यक्तिगत कहानी नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति पद के दौरान उनके अनुभवों को भी जगह दी गई है। किताब में राष्ट्रपति भवन के भीतर के कामकाज, संवैधानिक जिम्मेदारियों और उनके पांच साल के कार्यकाल के दौरान सामने आई महत्वपूर्ण परिस्थितियों पर भी चर्चा की गई है। प्रकाशक के मुताबिक, कोविंद ने राष्ट्रपति पद के दौरान देश के सामने आई कई महत्वपूर्ण परिस्थितियों को करीब से देखा। इनमें कोविड-19 महामारी जैसी बड़ी चुनौती और महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन से जुड़ा घटनाक्रम भी शामिल है। इस लिहाज से यह किताब उन पाठकों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है जो यह समझना चाहते हैं कि भारत के राष्ट्रपति के संवैधानिक पद की जिम्मेदारियां व्यवहार में कैसी होती हैं।
सार्वजनिक जीवन के संघर्षों पर भी फोकस
आत्मकथा का नाम ही बताता है कि इसमें सिर्फ उपलब्धियों की बात नहीं है। ‘My Life, My Struggles’ के जरिए कोविंद ने अपने जीवन में आए संघर्षों और उन परिस्थितियों को सामने रखने की कोशिश की है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। किसी सामान्य परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचना अपने आप में लंबी यात्रा रही है। इस दौरान सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों ने उनके जीवन को प्रभावित किया। किताब में इन्हीं अनुभवों को व्यक्तिगत नजरिए से प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि इसे केवल राजनीतिक पुस्तक के बजाय एक व्यक्तिगत जीवन यात्रा के रूप में भी देखा जा रहा है।
संविधान और सार्वजनिक सेवा के मूल्यों का जिक्र
रामनाथ कोविंद अपने सार्वजनिक जीवन में संविधान, सामाजिक समरसता और सार्वजनिक सेवा के मूल्यों पर जोर देते रहे हैं। उनकी आत्मकथा में भी उनके जीवन को प्रभावित करने वाले विचारों और व्यक्तित्वों का उल्लेख किया गया है। कोविंद ने पहले अपनी किताब के बारे में बताते हुए कहा था कि उनके जीवन और संघर्षों को ताकत देने वाले मूल्यों में भारतीय संविधान और राष्ट्रीय जीवन-मूल्य महत्वपूर्ण रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि किताब में उनके व्यक्तिगत अनुभवों के साथ-साथ उन विचारों पर भी चर्चा होगी, जिन्होंने उनके सार्वजनिक जीवन को दिशा दी।
राजनीति से राष्ट्रपति पद तक
रामनाथ कोविंद का राजनीतिक सफर कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरा। वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सदस्य रहे और दो कार्यकाल पूरे किए। इसके बाद उन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया। 16 अगस्त 2015 को उन्होंने बिहार के राज्यपाल का पद संभाला और 2017 में राष्ट्रपति पद के लिए उनका नाम सामने आया। 25 जुलाई 2017 को उन्होंने भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। 2022 में उनका राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा हुआ। उनके बाद द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद संभाला। आत्मकथा में इस पूरे राजनीतिक सफर को व्यक्तिगत अनुभवों के साथ समझने का मौका मिलेगा।
राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान कोविड का अनुभव
रामनाथ कोविंद के राष्ट्रपति कार्यकाल का एक बड़ा हिस्सा कोविड-19 महामारी के दौर से गुजरा। महामारी ने भारत समेत पूरी दुनिया को प्रभावित किया था। उस समय संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका, सरकार के सामने चुनौतियां और आम लोगों की मुश्किलें चर्चा में थीं। किताब के प्रकाशक ने भी राष्ट्रपति के रूप में कोविंद के कार्यकाल में कोविड-19 से जुड़े अनुभवों को प्रमुख विषयों में शामिल बताया है। इस वजह से पुस्तक में महामारी के दौर से जुड़े उनके अनुभव पाठकों के लिए खास दिलचस्प हो सकते हैं।
वन नेशन, वन इलेक्शन से भी जुड़ा रहा नाम
राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी रामनाथ कोविंद सार्वजनिक विमर्श से पूरी तरह अलग नहीं हुए। सितंबर 2023 में केंद्र सरकार ने उन्हें ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बनाई गई उच्चस्तरीय समिति का अध्यक्ष बनाया था। इस समिति ने मार्च 2024 में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। रिपोर्ट में देश में लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को एक साथ कराने से जुड़े सुझाव दिए गए थे। इस भूमिका ने भी कोविंद को संवैधानिक और चुनावी व्यवस्था से जुड़ी राष्ट्रीय बहस के केंद्र में रखा।
किताब में राजनीति के अंदरूनी अनुभव
आत्मकथा की एक खास बात यह भी है कि इसमें लेखक ने सिर्फ घटनाओं का उल्लेख नहीं किया है, बल्कि अपने अनुभवों और नजरिए के जरिए राजनीति तथा संवैधानिक पद की कार्यप्रणाली को समझाने की कोशिश की है। प्रकाशक के अनुसार, किताब में भारतीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से जुड़े कुछ अनुभवों के साथ राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियों और अधिकारों को करीब से समझने का अवसर मिलता है। इससे पाठकों को राजनीतिक घटनाओं को एक पूर्व राष्ट्रपति की नजर से देखने का मौका मिल सकता है।
पीएम मोदी करेंगे किताब का विमोचन
इस पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी इसे और महत्वपूर्ण बना रही है। प्रधानमंत्री किताब का औपचारिक विमोचन करेंगे और इस अवसर पर सभा को संबोधित भी करेंगे। रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविंद के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान साथ काम किया है। ऐसे में पुस्तक के विमोचन का कार्यक्रम राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह आत्मकथा?
किसी पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा केवल उनकी व्यक्तिगत कहानी नहीं होती। इसमें देश की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने का अवसर भी मिलता है। रामनाथ कोविंद की किताब इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें एक गांव से निकलकर राज्यसभा, बिहार के राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की कहानी शामिल है। यह पुस्तक युवाओं के लिए संघर्ष और सार्वजनिक सेवा की यात्रा को समझने का माध्यम भी बन सकती है। वहीं राजनीति, संविधान और शासन व्यवस्था में रुचि रखने वाले पाठकों को राष्ट्रपति पद के अनुभवों से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है।
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