TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल देखने को मिल सकता है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। बताया जा रहा है पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके नेतृत्व वाले बागी गुट के साथ अब 22 सांसद जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह समूह लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता की मांग करेगा।
ऐसे में अगर यह दावा सही साबित होता है तो ममता बनर्जी की पार्टी के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। वहीं केंद्र की राजनीति में भी इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
काकोली घोष ने किया बड़ा दावा
जानकारी के लिए बता दें की टीएमसी (TMC) सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कोलकाता एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि उनके साथ सांसदों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है। इससे पहले उन्होंने 20 सांसदों के समर्थन का दावा किया था।
काकोली के मुताबिक दो और सांसद उनके समूह में शामिल हुए हैं, लेकिन फिलहाल उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी नाम सामने आएंगे। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से कई सांसदों की आवाज नहीं सुनी जा रही थी, जिसके वजह से यह स्थिति पैदा हुई है।
स्पीकर से मिलकर करेंगे अलग गुट की मांग
बागी सांसदों का अगला कदम लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करना है। बताया जा रहा है कि कल सोमवार को यह समूह दिल्ली पहुंचकर स्पीकर से मुलाकात करेगा।
इन सांसदों की मांग है कि उन्हें टीएमसी से अलग एक स्वतंत्र संसदीय समूह के रूप में मान्यता दी जाए। यदि ऐसा होता है तो संसद में टीएमसी की स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
काकोली घोष का कहना है कि उनका समूह लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना चाहता है और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा।
19 सांसदों के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज आया सामने
मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को एक दस्तावेज सामने आया जिसमें 19 टीएमसी (TMC) सांसदों के हस्ताक्षर होने का दावा किया गया। इस पत्र में लोकसभा स्पीकर से अनुरोध किया गया है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले समूह को अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता दी जाए।
दस्तावेज में जिन सांसदों के नाम बताए गए हैं उनमें काकोली घोष दस्तीदार, सताब्दी रॉय, बापी हल्दर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, असित माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग और माला रॉय शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा रचना बनर्जी और सायनी घोष के हस्ताक्षर भी अलग से दिखाई दिए हैं। हालांकि अभी तक इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि लोकसभा स्पीकर कार्यालय को यह पत्र औपचारिक रूप से प्राप्त हुआ है या नहीं।

NDA को समर्थन देने की तैयारी
दरअसल राजनीतिक में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि बागी सांसदों ने केंद्र में बीजेपी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने की इच्छा जताई है। यदि यह समूह वास्तव में NDA का समर्थन करता है तो यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा। अब तक टीएमसी और बीजेपी एक-दूसरे के प्रमुख राजनीतिक विरोधी रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति का समीकरण बदल सकता है।
दिल्ली में होगी अहम बैठक
बता दें की पहले बागी सांसदों की बैठक कोलकाता में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति तैयार करने के लिए यह फैसला लिया गया।
इस बैठक में कई अहम राजनीतिक फैसले लिए जा सकते हैं। सांसदों के आगे की रणनीति, स्पीकर से मुलाकात और NDA के साथ संभावित तालमेल पर भी चर्चा होने की संभावना है।
शुवेंदु अधिकारी की भूमिका पर नजर
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुवेंदु अधिकारी का नाम भी इस घटनाक्रम के बीच चर्चा में है। खबरें थीं कि वह इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। हालांकि बताया जा रहा है कि व्यस्त कार्यक्रम के कारण उनका बैठक में शामिल होना मुश्किल है। फिर भी राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी की नजर बनी हुई है।
बागी गुट में कौन-कौन सांसद नहीं हैं?
टीएमसी (TMC) के कई बड़े चेहरे फिलहाल इस बागी गुट से दूरी बनाए हुए दिखाई दे रहे हैं। बता दें की जिन प्रमुख नेताओं के नाम दस्तावेज में नहीं हैं, उनमें अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, सौगत रॉय, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और सज्दा अहमद शामिल हैं। इन नेताओं की चुप्पी और रुख आने वाले दिनों में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
सुदीप बंदोपाध्याय और भूपेंद्र यादव की मुलाकात से बढ़ीं अटकलें
राजनीतिक हलकों में उस समय चर्चा और तेज हो गई जब टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की।
इस मुलाकात के बाद कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सामान्य राजनीतिक मुलाकात हो सकती है, जबकि कुछ इसे टीएमसी में चल रहे अंदरूनी संकट से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से इस मुलाकात को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
ममता बनर्जी के लिए बढ़ी चुनौती
टीएमसी के भीतर चल रही यह हलचल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। यदि सांसदों का यह समूह वास्तव में अलग गुट बना लेता है तो पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति में ताकत प्रभावित हो सकती है।फिलहाल सभी की नजर सोमवार को होने वाली स्पीकर से मुलाकात और उसके बाद आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है। अब आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह केवल असंतोष का प्रदर्शन है या फिर टीएमसी में वास्तव में बड़ी टूट होने जा रही है।
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