TMC Political Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा अंदरूनी संघर्ष अब खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के वरिष्ठ सांसद और कानूनी मामलों के जानकार नेता कल्याण बनर्जी ने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बता दें की उन्होंने न केवल अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं, बल्कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने बड़ा अल्टीमेटम भी रख दिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह विवाद एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले से शुरू हुआ, जिसमें कल्याण बनर्जी को अचानक किनारे कर दिया गया। इसके बाद उनके और अभिषेक बनर्जी के बीच तनाव खुलकर सामने आ गया है। ऐसे में आइए जानते हैं पूरा मामला
आधी रात का फोन कॉल बना विवाद की वजह
मिली जानकारी के अनुसार, कल्याण बनर्जी एक महत्वपूर्ण कानूनी मामले की तैयारी में जुटे हुए थे। यह मामला अभिषेक बनर्जी से जुड़ा हुआ था और अदालत में इसकी सुनवाई होने वाली थी। जिससे कल्याण बनर्जी ने इस केस के लिए लंबे समय तक तैयारी की थी और कोर्ट में घंटों इंतजार भी किया। ऐसे में उनका कहना है की आधी रात को एक फोन कॉल आया, जिसमें बताया गया कि अब इस मामले की पैरवी कोई दूसरा वकील करेगा। यह सूचना मिलने के बाद वे बेहद नाराज हो गए।
कल्याण बनर्जी का कहना है कि यदि उन्हें पहले ही बता दिया जाता कि किसी अन्य वकील को जिम्मेदारी दी जा रही है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती, लेकिन अंतिम समय पर इस तरह हटाया जाना उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम था।
‘मुझे डस्टबिन की तरह इस्तेमाल मत कीजिए’
दरअसल अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कल्याण बनर्जी ने कहा कि उनके साथ बेहद अपमानजनक व्यवहार किया गया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें ऐसा महसूस कराया गया जैसे उनकी कोई अहमियत ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता और वकील के साथ ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, अगर पार्टी नेतृत्व को उन पर भरोसा नहीं था तो पहले ही स्पष्ट कर देना चाहिए था। कल्याण बनर्जी ने भावुक अंदाज में कहा कि उन्हें “डस्टबिन” की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
अभिषेक बनर्जी पर लगाए गंभीर आरोप
कल्याण बनर्जी ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी के रवैये पर सवाल उठाए हैं। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि अभिषेक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का सम्मान नहीं करते और उनका व्यवहार बेहद अहंकारी है। उन्होंने कहा कि पार्टी के अनुभवी नेताओं को महत्व नहीं दिया जा रहा है और सभी के साथ कर्मचारियों जैसा व्यवहार किया जाता है। कल्याण बनर्जी के अनुसार, यही कारण है कि पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2022 से ही अभिषेक बनर्जी ने उन पर भरोसा नहीं किया और कई महत्वपूर्ण मामलों में उन्हें नजरअंदाज किया गया।

ममता बनर्जी के सामने रखा बड़ा अल्टीमेटम
दरअसल विवाद तब ज्यादा बढ़ गया जब कल्याण बनर्जी ने खुलकर कहा कि ममता बनर्जी को अब फैसला करना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी में या तो अभिषेक बनर्जी रहेंगे या फिर वे जैसे वरिष्ठ नेता। जिसके बाद यह बयान टीएमसी के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है, क्योंकि कल्याण बनर्जी लंबे समय से ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को जल्द नहीं सुलझाता, तो इसका असर संगठन पर पड़ सकता है।
टीएमसी में पहले भी दिख चुका है असंतोष
कल्याण बनर्जी पहले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्होंने पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हों। इससे पहले भी कई वरिष्ठ नेता अलग-अलग मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। हाल के वर्षों में पार्टी के भीतर कई नेताओं ने संगठनात्मक फैसलों और नेतृत्व शैली को लेकर असहमति जताई है। कुछ नेताओं ने सार्वजनिक मंचों पर भी अपनी बात रखी, जिससे पार्टी की अंदरूनी खींचतान सामने आई।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की सत्ता में बदलाव के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर बहस और तेज हो गई है।
कानूनी मामलों में अहम भूमिका निभाते रहे हैं कल्याण बनर्जी
कल्याण बनर्जी केवल सांसद ही नहीं बल्कि एक अनुभवी वकील भी हैं। वे लंबे समय से टीएमसी से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी मामलों की पैरवी करते रहे हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल मामलों में उन्होंने पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा है। यही वजह है कि उनके अचानक नाराज होने को टीएमसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। जिस मामले को लेकर विवाद शुरू हुआ, उसमें भी वे प्रमुख वकील की भूमिका निभा रहे थे। ऐसे में अंतिम समय पर उनकी जगह किसी अन्य वकील को लाना विवाद का कारण बन गया।
क्या बढ़ेगा टीएमसी का संकट?
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मामला केवल एक कानूनी केस तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पार्टी के भीतर नेतृत्व और अधिकार को लेकर चल रही खींचतान भी दिखाई देती है। यदि कल्याण बनर्जी और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद दूर नहीं हुए, तो आने वाले दिनों में टीएमसी को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में फिलहाल सभी की नजरें ममता बनर्जी पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि वे इस विवाद को किस तरह सुलझाती हैं और पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को कैसे नियंत्रित करती हैं।
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