West Bengal News: पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से पहले खान-पान को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है। बता दें बागेश्वर धाम के प्रमुख पुजारी धीरेंद्र शास्त्री ने लोगों से नवरात्रि और दुर्गा पूजा (Durga Puja 2026) के दौरान मांसाहारी भोजन से बचने की अपील की थी, लेकिन उनकी इस अपील के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
हालांकि, पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने साफ कर दिया है कि पार्टी बंगाल के लोगों की खाने की पसंद पर किसी तरह का आदेश नहीं देगी। साथ ही, उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति क्या खाता है, यह उसका निजी फैसला है। बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि बंगाल की संस्कृति में मछली और मांस (Bengal Food Culture) का लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। ऐसे में आइए जानते जानते यहां खबर को लेकर पूरी जानकारी
बागेश्वर बाबा ने क्या अपील की थी?
धीरेंद्र शास्त्री हाल ही में हावड़ा के लिलुआ में आयोजित तीन दिवसीय हनुमंत कथा कार्यक्रम में पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नवरात्रि और दुर्गा पूजा के समय मांसाहारी भोजन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने धार्मिक आयोजनों और दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास मांसाहारी भोजन बनाने और खाने पर आपत्ति जताई। साथ ही उन्होंने हिंदू समाज से नवरात्रि के दौरान शाकाहारी भोजन अपनाने की अपील की।
धीरेंद्र शास्त्री का कहना था कि धार्मिक आयोजनों के आसपास लोगों को अपनी खान-पान की आदतों को लेकर संवेदनशील होना चाहिए। उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। कुछ लोगों ने उनकी अपील का समर्थन किया, जबकि बंगाल के कुछ वर्गों ने इसे राज्य की पारंपरिक खान-पान संस्कृति में दखल के तौर पर देखा।

सामिक भट्टाचार्य ने क्यों किया विरोध?
बागेश्वर बाबा की अपील पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों की खान-पान की पसंद को किसी राजनीतिक या धार्मिक निर्देश के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता।
भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि जिस राज्य की संस्कृति और भोजन में मछली और मांस की इतनी बड़ी भूमिका है, वहां लोगों से अचानक इन्हें छोड़ने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का भी उल्लेख किया। बीजेपी नेता ने कहा कि विवेकानंद से जुड़े संदर्भों में भी देवी काली को मटन का भोग लगाने की बात सामने आती है। उनका तर्क था कि बंगाल की धार्मिक परंपराओं और खान-पान की संस्कृति को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
सामिक भट्टाचार्य ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति शाकाहार को बढ़ावा देना चाहता है तो वह इसके लिए स्वतंत्र है। लेकिन किसी धार्मिक व्यक्ति या राजनीतिक दल को यह तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि कोई व्यक्ति अपने घर में क्या खाए।
‘बंगालियों को जो पसंद होगा, वही खाएंगे’
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पार्टी पर पहले भी बंगाल की खान-पान संस्कृति को लेकर सवाल उठते रहे हैं। भट्टाचार्य ने संकेत दिया कि बीजेपी बंगाल में लोगों की भोजन संबंधी पसंद का सम्मान करेगी। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया जाएगा, जिसमें लोगों को मांस या मछली खाने से रोका जाए। उनका कहना था कि बंगाल में रहने वाले लोग अपनी पसंद के अनुसार भोजन करने के लिए स्वतंत्र हैं।
ऐसे में इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई है कि दुर्गा पूजा से पहले खान-पान का मुद्दा चुनावी राजनीति में कितना असर डाल सकता है।
बंगाल की राजनीति में खान-पान का मुद्दा
पश्चिम बंगाल में भोजन और संस्कृति का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। मछली को बंगाली संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में मांसाहार को लेकर कोई भी राजनीतिक या धार्मिक बयान आसानी से चर्चा का विषय बन जाता है।
बीजेपी पर पहले भी विपक्ष की ओर से आरोप लगाए गए थे कि पार्टी बंगाल में शाकाहार को बढ़ावा देने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, बीजेपी नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कई बार कहा है कि मछली बंगाली संस्कृति और भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ऐसे में धीरेंद्र शास्त्री की अपील और सामिक भट्टाचार्य के बयान को दो अलग-अलग नजरिए के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ धार्मिक आधार पर शाकाहार की अपील है, तो दूसरी तरफ बीजेपी का स्थानीय संस्कृति और व्यक्तिगत पसंद को लेकर संतुलित रुख सामने आया है।
दुर्गा पूजा पोस्टर को लेकर भी विवाद
इसी बीच पश्चिम बंगाल बीजेपी से जुड़ा एक और विवाद सामने आया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और दुर्गा पूजा आयोजकों के बीच होने वाली बैठक को लेकर कोलकाता पुलिस की ओर से लगाए गए एक पोस्टर पर विवाद हो गया। जिसके बाद आरोप लगाया गया कि पोस्टर में देवी दुर्गा को 10 की जगह 11 हाथों के साथ दिखाया गया। टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा और इसे लेकर सवाल उठाए।
वहीं, सामिक भट्टाचार्य ने इस गलती के लिए विज्ञापन एजेंसी को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि पोस्टर में हुई गलती को सुधार दिया जाएगा।
आगे बढ़ सकता है विवाद
बागेश्वर बाबा की अपील के बाद शुरू हुआ यह विवाद केवल धार्मिक बयान तक सीमित नहीं है। इसमें बंगाल की संस्कृति, लोगों की व्यक्तिगत पसंद और राजनीति तीनों मुद्दे जुड़ गए हैं।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का बयान यह संकेत देता है कि पार्टी बंगाल में खान-पान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर स्थानीय भावनाओं को ध्यान में रखना चाहती है। वहीं, धीरेंद्र शास्त्री की अपील को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
वहीं, दुर्गा पूजा के करीब आने के साथ ही यह मुद्दा आगे और राजनीतिक रंग लेता है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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