Ahmedabad Fire Factory: गुजरात के अहमदाबाद से आज शनिवार को एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर आई है। बताया जा रहा है की शहर के महमूदपुरा इलाके में स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई। जिसमें कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया। साथ ही फैक्ट्री में रखे बड़ी मात्रा में पटाखों और ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। बता दें इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 15 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिसके बाद सभी घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां कई लोगों की हालत नाजुक बनी हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासन और राहत एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान चलाया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि जिस फैक्ट्री में आग लगी है, उसका लाइसेंस पहले ही रद्द किया जा चुका था, लेकिन इसके बावजूद वहां अवैध रूप से पटाखे बनाने का काम जारी था।
दोपहर में अचानक लगी भीषण आग
जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर महमूदपुरा स्थित टैलेंट फायरवर्क्स फैक्ट्री में अचानक आग लग गई है। दरअसल शुरुआत में कर्मचारियों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन फैक्ट्री के अंदर बड़ी मात्रा में बारूद और पटाखे रखे होने के कारण आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। आग लगते ही जोरदार धमाकों की आवाजें आने लगीं। आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। देखते ही देखते पूरा परिसर धुएं और आग की लपटों से घिर गया।
8 लोगों की मौत, कई लोग गंभीर
बता दें की इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जिसमें मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। वहीं 15 से ज्यादा घायल लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक कुछ घायलों का शरीर बुरी तरह झुलस गया है और उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
ऐसे में प्रशासन का कहना है कि राहत और बचाव कार्य पूरा होने के बाद मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव हो सकता है।
लाइसेंस रद्द होने के बावजूद चल रही थी फैक्ट्री
दरअसल जांच में सामने आया है कि जिस फैक्ट्री में आग लगी, उसका संचालन मेहुल डोडिया नामक व्यक्ति के नाम पर किया जा रहा था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही रद्द कर दिया गया था।
इसके बावजूद फैक्ट्री को कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री झुग्गी-झोपड़ी जैसी अस्थायी संरचना में चल रही थी, जहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं थे। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी फैक्ट्री कैसे संचालित होती रही और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
पुलिस ने शुरू की जांच
ज्वॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस जयपाल सिंह ने बताया कि फैक्ट्री का लाइसेंस पहले ही निरस्त किया जा चुका था। इसके बावजूद वहां पटाखे बनाने का काम जारी था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फैक्ट्री मालिक सहित अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि लापरवाही या नियमों के उल्लंघन के सबूत मिले तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

RAF के जवान सबसे पहले पहुंचे
बता दें की हादसे के समय फैक्ट्री के पास ही रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) का कैंप मौजूद था। आग लगने की सूचना मिलते ही सबसे पहले RAF के जवान घटनास्थल पर पहुंचे और लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। इसके बाद फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां, पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंचीं। बचाव दल ने आग में फंसे लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया।
फायर ब्रिगेड ने संभाला मोर्चा
चीफ फायर ऑफिसर अमित डोगरे ने बताया कि आग काफी भीषण थी क्योंकि फैक्ट्री में बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री मौजूद थी। इसी वजह से आग बुझाने में काफी समय लगा।
फायर ब्रिगेड की टीम ने लगातार कई घंटों तक अभियान चलाकर आग को आसपास के इलाकों में फैलने से रोका। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो नुकसान और भी बड़ा हो सकता था।
आग लगने की वजह अभी साफ नहीं
ऐसे में फिलहाल आग लगने का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट, बारूद में विस्फोट या सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसी संभावनाओं पर जांच की जा रही है।
फॉरेंसिक टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया है, जो सबूत जुटाकर आग लगने की असली वजह का पता लगाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
हादसे की सूचना मिलते ही अहमदाबाद के मेयर और म्युनिसिपल कमिश्नर घटनास्थल पर पहुंचे और राहत कार्य का जायजा लिया। अधिकारियों ने अस्पताल जाकर घायलों का हाल भी जाना।
प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि लाइसेंस रद्द होने के बावजूद फैक्ट्री के संचालन पर रोक क्यों नहीं लगाई गई।
सुरक्षा नियमों पर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्रियों और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पटाखा निर्माण जैसे संवेदनशील उद्योग में सुरक्षा नियमों का पालन बेहद जरूरी है। यदि लाइसेंस रद्द होने के बाद भी ऐसी फैक्ट्रियां चलती रहेंगी तो भविष्य में भी इस तरह के बड़े हादसे होने का खतरा बना रहेगा।
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