Jharkhand Rajya Sabha Chunav: झारखंड की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा की दो सीटों के लिए बुधवार सुबह मतदान शुरू हो गया। चुनावी मुकाबले में कुल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसके कारण यह चुनाव राज्य की सियासत में चर्चा का केंद्र बन गया है। एक ओर सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन अपने दोनों उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान झारखंड विधानसभा परिसर में हो रहा है। सुबह से ही विधायकों की आवाजाही शुरू हो गई थी। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति बनाई थी। चुनाव से पहले होटल राजनीति, बैठकों और शक्ति प्रदर्शन ने इस मुकाबले को और अधिक रोमांचक बना दिया।
तीन उम्मीदवार, दो सीटें और सियासी गणित
इस चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को मैदान में उतारा है। इनके अलावा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी भी चुनाव लड़ रहे हैं। यही वजह है कि दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवारों के मैदान में होने से मुकाबला सीधा और रोचक बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक सीट पर जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम की स्थिति काफी मजबूत दिखाई दे रही है। असली मुकाबला दूसरी सीट के लिए कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच माना जा रहा है।
होटल से विधानसभा तक पहुंचाए गए विधायक
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की आशंकाओं को देखते हुए दोनों खेमों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की पूरी कोशिश की। कांग्रेस के अधिकांश विधायक रांची के होटल बीएनआर चाणक्य में ठहरे हुए थे। सुबह सभी विधायक एक साथ नाश्ता करने के बाद बस से विधानसभा पहुंचे। दूसरी ओर एनडीए ने भी अपने विधायकों को होटल में ठहराकर एकजुट रखने की रणनीति अपनाई। राजनीतिक गलियारों में पिछले कई दिनों से “होटल पॉलिटिक्स” की चर्चा थी। दोनों पक्षों को डर था कि कहीं कोई विधायक पाला न बदल ले। इसी कारण लगातार बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर चलता रहा।
क्यों अहम है यह चुनाव?
झारखंड में राज्यसभा की इन दो सीटों का चुनाव सिर्फ सांसद चुनने तक सीमित नहीं है। इसे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले शक्ति परीक्षण के रूप में भी देखा जा रहा है। चुनाव का परिणाम यह संकेत देगा कि राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष की वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि इंडिया गठबंधन दोनों सीटें जीतने में सफल रहता है तो यह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं यदि भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीत दर्ज करते हैं तो इसे विपक्ष की बड़ी सफलता माना जाएगा।
परिमल नाथवानी पर टिकी निगाहें
इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की हो रही है। वे पहले भी झारखंड से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया था, लेकिन उन्हें भाजपा और एनडीए का समर्थन प्राप्त है। नामांकन प्रक्रिया के दौरान उनके दस्तावेजों को लेकर विवाद भी हुआ था। कांग्रेस और जेएमएम ने आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में निर्वाचन अधिकारी ने उनका नामांकन वैध घोषित कर दिया। इसके बाद चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया।
इंडिया गठबंधन की रणनीति
सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन ने चुनाव से पहले लगातार बैठकें कीं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास पर भी गठबंधन के नेताओं और विधायकों की बैठक हुई। गठबंधन का दावा है कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है और दोनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित है। जेएमएम और कांग्रेस नेताओं का कहना है कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की संभावना नहीं है। वहीं गठबंधन को वामपंथी दलों का भी समर्थन मिलने की बात सामने आई है, जिससे उनकी स्थिति और मजबूत मानी जा रही है।
एनडीए की उम्मीदें भी बरकरार
दूसरी ओर भाजपा और एनडीए भी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनाव के नतीजे सभी को चौंका सकते हैं। एनडीए खेमे को उम्मीद है कि कुछ अतिरिक्त वोट उन्हें फायदा पहुंचा सकते हैं। राजनीतिक हलकों में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि किसी भी पक्ष ने सार्वजनिक रूप से ऐसी संभावना स्वीकार नहीं की है। फिर भी राज्यसभा चुनावों में गुप्त मतदान की प्रक्रिया के कारण अंतिम परिणाम तक सस्पेंस बना रहता है।
राज्यसभा चुनाव का गणित
राज्यसभा चुनाव में जीत का गणित विधानसभा की संख्या पर आधारित होता है। प्रत्येक दल अपने विधायकों की संख्या के अनुसार उम्मीदवारों को जिताने की रणनीति बनाता है। इस बार मुकाबला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि तीन उम्मीदवार दो सीटों के लिए मैदान में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पहली सीट का परिणाम लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन दूसरी सीट पर वोटों का बंटवारा और संभावित क्रॉस वोटिंग परिणाम को प्रभावित कर सकती है।
पूरे राज्य की नजर परिणाम पर
मतदान के साथ ही पूरे राज्य की नजर अब मतगणना और अंतिम परिणाम पर टिक गई है। चुनाव परिणाम यह बताएगा कि झारखंड की राजनीति में किस गठबंधन की पकड़ ज्यादा मजबूत है और किसकी रणनीति सफल रही। राज्यसभा चुनाव अक्सर शांतिपूर्ण और कम चर्चित माने जाते हैं, लेकिन इस बार झारखंड में यह चुनाव पूरी तरह राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है।
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