Mamata Banerjee INDIA Bloc Meeting: पश्चिम बंगाल की राजनीति को इस बार के चुनाव में बड़ा झटका लगने के बाद से ममता बनर्जी आए दिन सुर्खियों में बनी हुई है। दरअसल, अब खबरें सामने आ रही है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर विपक्षी एकता के मंच INDIA गठबंधन की ओर लौटती नजर आ रही हैं। बंगाल में 15 साल पुरानी सत्ता खोने और पार्टी में बढ़ती असंतुष्टि के बीच ममता बनर्जी में यह अहम फैसला लिया है, जिसके बाद वह 8 जून को नई दिल्ली में होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होगी।
जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली की यह महागठबंधन बैठक सिर्फ विपक्षी रणनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि ममता बनर्जी के लिए अपनी राष्ट्रीय राजनीतिक भूमिका को दोबारा मजबूत करने का भी एक अच्छा अवसर साबित हो सकता है। वहीं, इन दिनों TMC के कई नेताओं के द्वारा पार्टी छोड़कर भागने की चर्चाएं से लगभग ममता बनर्जी टूट चुकी हैं। ऐसे में विपक्षी दलों के साथ संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश पार्टी को सशक्त बना सकती है।
3 दिन दिल्ली में रहेंगी ममता बनर्जी
मिली जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी की रविवार से लेकर मंगलवार तक राष्ट्रीय राजधानी में रुक की संभावना जताई जा रही है। इस दौरान उनकी कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात की पूरी-पूरी संभावना जताई जा रही है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और बैठक की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
यह भी बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी से भी मुलाकात करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि अभी तक कांग्रेस या गांधी परिवार की ओर से इस संभावित बैठक को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बंगाल की बदली राजनीतिक हालात ने बदला ममता का रुख
वहीं, कुछ समय पहले तक बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विपक्षी गठबंधन के भीतर अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने कई मौकों पर कांग्रेस नेतृत्व और खासकर राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल उठाए थे। यही वजह थी कि INDIA गठबंधन के भीतर भी TMC और कांग्रेस के संबंधों में खटास देखने को मिली थी, लेकिन अब राजनीतिक हालत बदल चुके हैं। पश्चिम बंगाल में सत्ता से बाहर होने के बाद TMC के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के कई नेता खुलकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं और संगठन में टूट की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी दलों का समर्थन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस का बदला हुआ रवैया
ममता बनर्जी की दिल्ली यात्रा से पहले कांग्रेस नेताओं के बयान भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि जब TMC मजबूत स्थिति में थी, तब उसने कांग्रेस को पर्याप्त महत्व नहीं दिया। अब जब पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है, तो कांग्रेस भी पहले जैसी राजनीतिक गर्मजोशी दिखाने के मूड में नहीं दिखाई दे रही है।
बंगाल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कांग्रेस विपक्षी एकता के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनका कहना है कि गठबंधन में सहयोग जारी रहेगा, लेकिन पुराने दिनों जैसी नजदीकियां शायद अब देखने को न मिलें। यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कांग्रेस फिलहाल ममता बनर्जी को बिना शर्त समर्थन देने के पक्ष में नहीं है।
8 जून की बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
दिल्ली में होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक कई अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रहेगी। बैठक में NEET परीक्षा विवाद, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की कीमतें और संसद के आगामी मानसून सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
विपक्षी दल इन मुद्दों को लेकर एक साझा एजेंडा तैयार करना चाहते हैं ताकि संसद और जनता के बीच सरकार के खिलाफ एकजुट आवाज उठाई जा सके। बैठक में कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
AAP और DMK की दूरी बढ़ा सकती है चुनौती
विपक्षी एकता की इस कोशिश के बीच कुछ बड़ी पार्टियों की दूरी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) जैसी पार्टियों ने इस बैठक से दूरी बना ली है।
यह भी बताया जा रहा है कि अगर विपक्षी गठबंधन के प्रमुख सहयोगी दल ही एक मंच पर नहीं आते हैं, तो INDIA गठबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में ममता बनर्जी की मौजूदगी बैठक को राजनीतिक महत्व जरूर दे सकती है, लेकिन गठबंधन की मजबूती के लिए व्यापक एकजुटता की जरूरत होगी।
क्या ममता को मिलेगा राजनीतिक सहारा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि क्या कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल ममता बनर्जी को फिर से पहले जैसी अहमियत देंगे? पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद TMC की राजनीतिक ताकत पहले जैसी नहीं रही है। ऐसे में ममता बनर्जी के लिए राष्ट्रीय राजनीति में प्रभाव बनाए रखना आसान नहीं होगा, लेकिन फिर भी विपक्षी राजनीति में उनका अनुभव और जनाधार उन्हें पूरी तरह हाशिये पर नहीं जाने देता। यही कारण है कि उनकी दिल्ली यात्रा और INDIA गठबंधन की बैठक पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ममता बनर्जी की यह कदम सिर्फ राजनीतिक औपचारिकता है या फिर विपक्षी राजनीति में उनकी नई पारी की शुरुआत देने में मदद करेगा।
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