Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मस्जिद पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बता दें करीब 150 साल पुरानी बताई जा रही मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण बताते हुए प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। कोर्ट के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने भी सवाल उठाए हैं। मायावती ने सरकार से ऐसे मामलों में जल्दबाजी से बचने और विवादों के समाधान के दूसरे रास्ते तलाशने की अपील की है। आइए यहां पढ़ें पूरी खबर
सहारनपुर मस्जिद पर क्या हुआ?
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर से जुड़े क्षेत्र में स्थित इस मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी थी और इस मामले को लेकर करीब डेढ़ साल तक कानूनी प्रक्रिया चली। अदालत की ओर से निर्माण को अवैध घोषित किए जाने के बाद शनिवार तड़के पुलिस और जिला प्रशासन की मौजूदगी में मस्जिद को बुलडोजर से गिरा दिया गया।
कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ गईं। विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है।
मायावती ने सरकार को दी सलाह
बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सहारनपुर की घटना पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद समेत उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर उन्हें ध्वस्त करने का जो अभियान चल रहा है, वह उचित नहीं है।
मायावती ने कहा कि संवैधानिक और सेक्युलर सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी धर्मों को मानने वाले लोगों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करे। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में नकारात्मक परिस्थितियां पैदा होने से रोकने के लिए कार्रवाई पर विचार किया जाए और विवादों के समाधान के दूसरे रास्ते तलाशे जाएं। उन्होंने धार्मिक स्थलों को लेकर संवेदनशीलता बरतने की जरूरत पर भी जोर दिया। मायावती के मुताबिक, धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में सरकार को ऐसा कदम उठाना चाहिए जिससे सामाजिक सौहार्द बना रहे।
1. ज़िला सहारनपुर की मस्जिद सहित पूरे उत्तर प्रदेश में आएदिन मस्जिदों को काफी आपाधापी में अवैध बताकर उनको ध्वस्त करने का जो सरकारी अभियान चल रहा है वह ठीक नहीं है तथा सरकार को ऐसे निगेटिव हालात से बचने के लिये इस पर तुरन्त रोक लगाकर इसके समाधान के अन्य उपाय ज़रूर करने चाहिये।
2.…— Mayawati (@Mayawati) September 5, 2026
‘सरकार ही नहीं, कोर्ट भी ध्यान दे’
मायावती ने अपने बयान में केवल सरकार को ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका से भी ऐसे मामलों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिना नियम-कानून का उचित पालन किए किसी आरोपी के मकान को गिराना और उसके पूरे परिवार को बेघर कर देना भी चिंता का विषय है।
बसपा प्रमुख ने कानून के शासन को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई में नियम और कानूनी प्रक्रिया का पालन होना जरूरी है। साथ ही उन्होंने लोगों से भी शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने की अपील की।
इमरान मसूद ने जताया विरोध
सहारनपुर की मस्जिद पर कार्रवाई को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने रात में लाइव आकर इस मामले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही।
इमरान मसूद ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मामले को कानूनी तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और चर्चा में आ गया है।
इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप
कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने भी सहारनपुर की घटना पर नाराजगी जाहिर की। वह इस मुद्दे को लेकर सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन उनके मुताबिक पुलिस ने उन्हें देर रात से ही हाउस अरेस्ट कर लिया।
इकरा हसन ने सवाल उठाया कि क्या जनता से जुड़े मुद्दों पर अधिकारियों से मिलने के लिए जनप्रतिनिधियों को भी रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि को रोकना जनता की आवाज को दबाने जैसा है।
कार्रवाई के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
सहारनपुर की मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां कार्रवाई और उसके तरीके पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं प्रशासन की ओर से इसे अदालत के आदेश के अनुपालन से जुड़ी कार्रवाई बताया गया है।
मामले में अब राजनीतिक नेताओं के बयान के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी आगे की गतिविधियों पर नजर रहेगी। इमरान मसूद ने जहां मामले को उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की बात कही है, वहीं मायावती ने सरकार और न्यायपालिका दोनों से ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बरतने की अपील की है। फिलहाल सहारनपुर की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मुद्दा बनती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में इस मामले पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
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