Modi Trump Meeting: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह फ्रांस के दौरे पर जाने वाले हैं, जहां वह 15 से 17 जून के बीच आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरे को लेकर भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संभावित मुलाकात को माना जा रहा है।
हालांकि अभी तक दोनों नेताओं के बीच किसी आधिकारिक द्विपक्षीय बैठक की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि G7 सम्मेलन के दौरान दोनों नेता आमने-सामने आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह पिछले डेढ़ साल में मोदी और ट्रंप की पहली प्रत्यक्ष मुलाकात होगी।
फ्रांस में होगा G7 का महामंच
इस बार G7 शिखर सम्मेलन फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-ले-बैंस (Évian-les-Bains) में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन 15 से 17 जून तक चलेगा और इसमें दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता हिस्सा लेंगे। फ्रांस इस वर्ष G7 की अध्यक्षता कर रहा है और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस आयोजन की मेजबानी करेंगे। भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में बढ़ती भूमिका के कारण उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है।
विदेश मंत्रालय ने की दौरे की पुष्टि
भारत के विदेश मंत्रालय ने प्रधानमंत्री मोदी के फ्रांस दौरे की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री 13 से 18 जून के बीच फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान G7 सम्मेलन उनकी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होगा।
मोदी-ट्रंप मुलाकात पर क्यों टिकी हैं नजरें?
भारत और अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यदि G7 सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की मुलाकात होती है तो कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। इनमें व्यापार समझौता, वैश्विक सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), चीन की बढ़ती भूमिका और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीति प्रमुख हो सकती है।
हाल के महीनों में आई थी तल्खी
भारत-अमेरिका संबंधों में पिछले कुछ महीनों के दौरान कुछ मुद्दों पर मतभेद भी सामने आए थे। भारत-पाकिस्तान से जुड़े मामलों पर ट्रंप के कुछ बयानों ने नई दिल्ली में चर्चा पैदा की थी। इसके अलावा चीन और एशिया से जुड़े कुछ मुद्दों पर भी दोनों देशों के दृष्टिकोण में अंतर दिखाई दिया था। हालांकि इसके बावजूद दोनों देशों ने संवाद के रास्ते कभी बंद नहीं किए और लगातार उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखा।
रिश्तों को मजबूत करने की कोशिशें जारी
हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठकें हुई हैं। अमेरिकी प्रशासन और भारत सरकार के बीच व्यापार, रक्षा और नई तकनीकों पर बातचीत लगातार जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच मतभेदों से ज्यादा साझा हित हैं। यही कारण है कि दोनों पक्ष संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
व्यापार समझौता बन सकता है बड़ा मुद्दा
भारत और अमेरिका इस समय व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के अधिकारी सीमा शुल्क, निवेश, डिजिटल व्यापार और बाजार पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यदि मोदी और ट्रंप की मुलाकात होती है तो व्यापार समझौते को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकती है।
AI और तकनीक पर भी होगी चर्चा
G7 सम्मेलन का एक प्रमुख विषय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकें हैं। भारत और अमेरिका दोनों AI क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में तकनीकी सहयोग, डेटा सुरक्षा और डिजिटल इनोवेशन जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
वैश्विक सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
G7 सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया की स्थिति, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक असंतुलन जैसे मुद्दे सम्मेलन के एजेंडे में शामिल हैं। भारत इन सभी विषयों पर अपनी स्वतंत्र और संतुलित नीति के लिए जाना जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दुनिया क्यों देख रही है फ्रांस की ओर?
G7 सम्मेलन इस बार सिर्फ आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहने वाला। वैश्विक शक्ति संतुलन, नई तकनीक, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषय भी केंद्र में रहेंगे। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंधों के कारण मोदी-ट्रंप मुलाकात सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि अभी तक किसी औपचारिक बैठक की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों नेताओं की मौजूदगी ने इस संभावना को काफी मजबूत बना दिया है।
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