हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार माने जाने वाले राजेश खन्ना एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार वजह उनकी कोई फिल्म नहीं, बल्कि अभिनेत्री मौसमी चटर्जी का हाल में दिया हुआ बयान है. 70 के दशक की मशहूर अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में राजेश खन्ना के स्टारडम, व्यवहार और उनके डाउनफॉल को लेकर कई बड़े खुलासे किए हैं. उन्होंने कहा कि इंसान को अपने कर्मों का फल जरूर मिलता है और स्टारडम हमेशा नहीं रहता. मौसमी चटर्जी का यह बयान सोशल मीडिया और फिल्मी गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है.
बॉलीवुड का पहला सुपरस्टार
हिंदी सिनेमा में जब भी सुपरस्टार शब्द का जिक्र होता है तो सबसे पहले राजेश खन्ना का नाम सामने आता है. एक दौर ऐसा था जब उनकी लोकप्रियता का कोई मुकाबला नहीं था. लड़कियां उनकी तस्वीरों को चूमकर खत भेजती थीं। सड़कों पर उनकी एक झलक पाने के लिए भीड़ उमड़ जाती थी. निर्माता और निर्देशक उनकी तारीख पाने के लिए महीनों इंतजार करते थे. आराधना, आनंद, कटी पतंग और अमर प्रेम जैसी फिल्मों ने उन्हें सफलता की उस ऊंचाई तक पहुंचाया, जहां पहुंचना हर अभिनेता का सपना होता है. लेकिन समय के साथ उनकी जिंदगी में बदलाव आया और उनका स्टारडम धीरे-धीरे कम होने लगा.
मौसमी चटर्जी ने खोले पुराने राज
मौसमी चटर्जी ने एक इंटरव्यू में अपने और राजेश खन्ना के रिश्तों को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि पर्दे पर भले ही सबकुछ अच्छा दिखाई देता था, लेकिन पर्दे के पीछे कई रिश्ते उतने आसान नहीं थे. मौसमी के मुताबिक, राजेश खन्ना सफलता के नशे में पूरी तरह डूब चुके थे. उन्होंने उन्हें “बिगड़ैल नवाब” तक कह दिया. एक्ट्रेस ने बताया कि सुपरस्टार बनने के बाद राजेश खन्ना का व्यवहार काफी बदल गया था. वह सेट पर कई बार दूसरों की भावनाओं की परवाह नहीं करते थे और अपनी बात मनवाने की कोशिश करते थे.
“स्टारडम हमेशा नहीं रहता”
मौसमी चटर्जी ने कहा कि सफलता इंसान की सबसे बड़ी परीक्षा होती है और हर कोई इसे संभाल नहीं पाता. उनके अनुसार, राजेश खन्ना को अपनी लोकप्रियता पर इतना भरोसा हो गया था कि उन्हें लगने लगा था कि इंडस्ट्री उन्हीं के हिसाब से चलेगी. उन्होंने कहा कि उस दौर में जो कलाकार सबसे ऊपर होता था, वही इंडस्ट्री के नियम तय करता था और राजेश खन्ना खुद को उसी स्थिति में देखते थे. लेकिन समय बदलता है और यही जिंदगी का सच है.
अमिताभ बच्चन की एंट्री के बाद बदला दौर
मौसमी चटर्जी ने यह भी कहा कि बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन की एंट्री के बाद इंडस्ट्री का माहौल तेजी से बदलने लगा. दर्शकों की पसंद बदल रही थी. लोगों को नए तरह का सिनेमा और नया अंदाज पसंद आने लगा. धीरे-धीरे राजेश खन्ना का जादू फीका पड़ने लगा. जिस अभिनेता के नाम से फिल्में हिट हो जाती थीं, वही धीरे-धीरे अकेलेपन और करियर के कठिन दौर से गुजरने लगे.
“अकेलापन जिंदगी का हिस्सा है”
मौसमी चटर्जी ने इंटरव्यू में अकेलेपन पर भी बात की. उन्होंने कहा कि अकेलापन हर इंसान की जिंदगी में आता है और इंसान को उसे स्वीकार करना सीखना चाहिए. एक्ट्रेस ने उदाहरण देते हुए किशोर कुमार और मधुबाला का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये दोनों कलाकार भी जिंदगी में अकेलेपन से गुजरे थे. मौसमी के मुताबिक, स्टारडम और शोहरत हमेशा साथ नहीं रहती. आखिर में इंसान को खुद के साथ ही जीना पड़ता है.
राजेश खन्ना का डाउनफॉल क्यों हुआ?
मौसमी चटर्जी का मानना है कि राजेश खन्ना अपने करियर के ढलान को स्वीकार नहीं कर पाए. उन्होंने कहा कि हर इंसान को अपने कर्मों का हिसाब देना पड़ता है. अगर कोई अपने आसपास के लोगों की भावनाओं को नजरअंदाज करता है, तो समय के साथ उसका असर दिखाई देता है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि राजेश खन्ना बेहद प्रतिभाशाली अभिनेता थे और उनकी लोकप्रियता आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है.
आज भी याद किए जाते हैं “काका”
राजेश खन्ना को प्यार से “काका” कहा जाता था. भले ही उनके करियर में उतार-चढ़ाव आए हों, लेकिन हिंदी सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा. उनकी फिल्मों के गाने और संवाद आज भी लोगों की जुबान पर हैं. नई पीढ़ी भी उनकी फिल्मों को पसंद करती है. फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि राजेश खन्ना सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के एक दौर का नाम थे.
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
मौसमी चटर्जी के बयान के बाद सोशल Media पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग मौसमी की बातों से सहमत नजर आए, तो कुछ फैंस ने राजेश खन्ना का बचाव भी किया. कई यूजर्स ने कहा कि स्टारडम का दबाव किसी भी कलाकार की जिंदगी को बदल सकता है. वहीं कुछ लोगों का मानना है कि सफलता और अकेलापन अक्सर साथ-साथ चलते हैं. फिलहाल मौसमी चटर्जी का यह इंटरव्यू एक बार फिर बॉलीवुड के पुराने दौर की कई यादों को ताजा कर रहा है.
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