Delhi News: दिल्ली के पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता सत्येंद्र कुमार जैन को आज गुरुवार के दिन दिल्ली जल बोर्ड से (Delhi Jal Board Scam) जुड़े घोटाले के मामले में बड़ी राहत मिली है। बता दें राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है।
वहीं, सत्येंद्र जैन की ओर से वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने अदालत में पक्ष रखा। जिसमें उन्होंने कहा कि जैन को 2 लाख रुपये के मुचलके पर जमानत दी गई है। यह मामला दिल्ली जल बोर्ड में कथित वित्तीय अनियमितताओं और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। ऐसे में आइए जनते हैं यहां पूरी खबर
पूछताछ के बाद हुई थी सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी
सत्येंद्र जैन के वकील का कहना है कि FIR दर्ज होने के बाद ACB ने उन्हें दो बार पूछताछ के लिए बुलाया था। जिसमें पहली बार पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया था। हालांकि, दूसरी बार पूछताछ के लिए बुलाए जाने के बाद ACB ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद वकील ने अदालत को बताया कि मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेज और अन्य संबंधित सामग्री पहले ही जांच एजेंसी द्वारा जब्त की जा चुकी है। ऐसे में जैन को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है।
वहीं, ACB ने जमानत का विरोध किया। जांच एजेंसी की ओर से दलील दी गई कि सत्येंद्र जैन को जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है। एजेंसी ने उन्हें आदतन अपराधी बताते हुए जमानत नहीं देने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जैन को जमानत देने का फैसला किया।
27 महीने बाद हुई थी गिरफ्तारी
इस मामले में FIR दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी हुई थी। ACB ने 11 मई 2024 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत FIR नंबर 10/2024 दर्ज की थी। इसके साथ ही मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420, 409, 418 और 120-B के तहत भी आरोप लगाए गए थे।
मामले की जांच दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर शुरू हुई थी। जांच एजेंसी ने दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर से जुड़ी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की।
सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों की गिरफ्तारी
जानकारी के लिए बता दें इस मामले में ACB ने सत्येंद्र जैन के अलावा पांच अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था। इनमें दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO और IAS अधिकारी उदित प्रकाश राय, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव, AN एंटरप्राइजेज के मालिक नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के मालिक पंकज वर्मा शामिल हैं।
जांच के दौरान एजेंसी ने इन सभी लोगों से पूछताछ की और मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। करीब 27 महीने तक जांच चलने के बाद 18 अगस्त 2026 को सभी छह आरोपियों को पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
STP टेंडर में अनियमितताओं का आरोप
पूरे मामले का संबंध दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े टेंडर से है। ACB का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और इसमें अनियमितताएं हुईं। जांच एजेंसी मामले में कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य और जल समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इससे पहले भी वह अलग-अलग मामलों को लेकर जांच एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। हालांकि, मौजूदा जल बोर्ड मामले में कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है।
कोर्ट के फैसले से मिली राहत
राउज एवेन्यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) का यह फैसला सत्येंद्र जैन के लिए बेहद महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। जमानत मिलने के बाद अब वह जेल से बाहर आ सकते हैं, हालांकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
ऐसे में जमानत का मतलब मामले में आरोपों से पूरी तरह बरी होना नहीं है। जांच और अदालती कार्यवाही के दौरान आरोपों की सुनवाई जारी रहेगी। अदालत आगे मामले से जुड़े सबूतों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी। फिलहाल, सत्येंद्र जैन को 2 लाख रुपये के मुचलके पर मिली जमानत से आम आदमी पार्टी के नेता को बड़ी राहत मिली है। दूसरी ओर, ACB की जांच इस कथित जल बोर्ड घोटाले में आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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