TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आ गया है। बताया जा रहा है की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही बगावत अब नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। जिससे पहले विधायकों के विद्रोह से जूझ रही पार्टी अब सांसदों की नाराजगी की खबरों के कारण और दबाव में आ गई है। सूत्रों का कहना है की टीएमसी के 23 सांसद बागी गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी की स्थिति पर चर्चा और आगे की रणनीति तय करने के लिए कोलकाता स्थित अपने आवास पर बड़ी बैठक बुलाई है।
विधायकों की बगावत के बाद बढ़ी मुश्किलें
आपकी जानकारी के लिए बता दें की हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी को बड़ा झटका लगा था, जब पार्टी के 58 विधायक बागी गुट के साथ खड़े हो गए। पार्टी से निष्कासित किए जा चुके संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बने इस गुट ने विधानसभा में खुद को अलग पहचान देने की कोशिश शुरू कर दी। जिसके बाद बागी विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष घोषित किया और विधानसभा स्पीकर ने भी उन्हें मान्यता दे दी। इस फैसले ने टीएमसी नेतृत्व की चिंता और बढ़ा दी है।
अब सांसदों के बगावत की चर्चा तेज
विधायकों के बाद अब सांसदों की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी के 23 सांसद बागी नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है, लेकिन अंदरखाने चल रही हलचल ने टीएमसी नेतृत्व को अलर्ट कर दिया है।
सूत्रों का दावा है कि कई सांसद पार्टी के अंदर फैसले लेने की प्रक्रिया और नेतृत्व शैली से नाराज हैं। इनमें से कुछ सांसदों की नाराजगी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को लेकर भी बताई जा रही है।
ऋतब्रत बनर्जी के बयान से बढ़ा सस्पेंस
बागी गुट के प्रमुख चेहरों में शामिल ऋतब्रत बनर्जी ने सांसदों की संभावित बगावत को लेकर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके बयान ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।
कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या टीएमसी के सांसद किसी बड़े कदम की तैयारी कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनकी किसी सांसद से बात नहीं हुई है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में क्या होगा, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
ऐसे में उनके इस बयान के बाद राजनीतिक एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर और बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
दल-बदल कानून के तहत क्या है गणित?
लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। यदि सांसद अलग गुट बनाना चाहते हैं, तो उन्हें दल-बदल कानून के तहत कार्रवाई से बचने के लिए आवश्यक संख्या जुटानी होगी।
जानकारी के अनुसार, लोकसभा में अलग गुट की मान्यता के लिए कम से कम दो-तिहाई सांसदों का समर्थन जरूरी होगा। इस हिसाब से करीब 19 सांसदों का साथ होना आवश्यक माना जा रहा है। वहीं राज्यसभा में टीएमसी के 13 सांसद हैं। यदि वहां भी कोई अलग गुट बनता है तो उसे मान्यता पाने के लिए आवश्यक संख्या जुटानी होगी।
ममता बनर्जी ने बुलाई इमरजेंसी बैठक
दरअसल पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और बगावत की खबरों के बीच ममता बनर्जी अब सक्रिय हो गई हैं। उन्होंने कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
इस बैठक में पार्टी की मौजूदा स्थिति, बागी नेताओं की रणनीति और संगठन को मजबूत बनाए रखने के उपायों पर चर्चा होने की संभावना है। जिसमें माना जा रहा है कि बैठक में पार्टी के अधिकांश बड़े नेताओं को बुलाया गया है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बैठक टीएमसी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी नजर
टीएमसी की स्थापना ममता बनर्जी ने करीब 28 साल पहले की थी। अब पार्टी के भीतर बढ़ती टूट की आशंकाओं के बीच नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बगावत और बढ़ती है तो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर असर पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला चुनाव आयोग और संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत ही होगा।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
टीएमसी में जारी इस राजनीतिक संकट ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को पूरी तरह गर्मा दिया है। विपक्षी दल भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में सांसदों और विधायकों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद राज्य की राजनीति में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं।
अब ऐसे में फिलहाल सबकी निगाहें ममता बनर्जी की बैठक और उसके बाद लिए जाने वाले फैसलों पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि टीएमसी इस संकट से उबर पाती है या फिर पार्टी के भीतर बगावत और तेज होती है।
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