कल्याण बनर्जी: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress के भीतर अब खुलकर असंतोष सामने आने लगा है। जिसमें पार्टी के लोकसभा सांसदों का एक बड़ा धड़ा नेतृत्व के फैसलों से नाराज बताया जा रहा है। हाल ही में लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के रूप में Kalyan Banerjee की नियुक्ति ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है। खासतौर पर महिला सांसदों में इस फैसले को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि अगर हालात नहीं संभले तो टीएमसी में टूट जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।
काकोली घोष दस्तीदार की जगह मिली जिम्मेदारी
TMC नेतृत्व ने लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक Kakoli Ghosh Dastidar को हटाकर उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नियुक्त किया है। दरअसल यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब पार्टी पहले से ही चुनावी हार और संगठनात्मक कमजोरी के कारण दबाव में है। जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर हुई पार्टी की अंदरूनी बैठक में इस नियुक्ति पर मुहर लगी। हालांकि, फैसले के बाद पार्टी के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए। कई सांसदों का मानना है कि ऐसे नेता को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना गलत संदेश देता है, जिन पर पहले भी विवादित व्यवहार के आरोप लग चुके हैं।
महिला सांसदों में ज्यादा नाराजगी
बताया जा रहा है कि टीएमसी की महिला सांसद इस नियुक्ति से सबसे ज्यादा नाराज हैं। लोकसभा में पार्टी के कुल 28 सांसद हैं, जिनमें 11 महिला सांसद शामिल हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कई महिला सांसदों ने नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करने की तैयारी कर ली है। महिला नेताओं का आरोप है कि पार्टी नेतृत्व महिलाओं की भावनाओं और सम्मान को नजरअंदाज कर रहा है। कुछ सांसदों का यह भी कहना है कि पार्टी को महिला सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश देने की जरूरत है, लेकिन ऐसे फैसलों से उल्टा असर पड़ रहा है।
महुआ मोइत्रा विवाद फिर आया चर्चा में
कल्याण बनर्जी का नाम पिछले साल उस समय भी विवादों में आया था जब उनकी Mahua Moitra के साथ सार्वजनिक रूप से तीखी बहस हुई थी। उस विवाद ने राष्ट्रीय राजनीति में भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। महुआ मोइत्रा ने कल्याण बनर्जी पर निजी टिप्पणियां करने और अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया था। मामला इतना बढ़ गया था कि पार्टी पर भी दबाव बनने लगा। इसके बाद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में टीएमसी के चीफ व्हिप पद से इस्तीफा दे दिया था। अब एक बार फिर उन्हें उसी अहम जिम्मेदारी पर वापस लाए जाने से पार्टी के अंदर पुराने विवाद ताजा हो गए हैं।
महुआ मोइत्रा ने क्या कहा था?
महुआ मोइत्रा ने उस समय कल्याण बनर्जी की टिप्पणियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बिना नाम लिए कहा था कि देश की राजनीति में ऐसे कई पुरुष मौजूद हैं जो महिलाओं के प्रति अपमानजनक सोच रखते हैं। महुआ ने कहा था कि कुछ लोग महिलाओं का सम्मान करना नहीं जानते और उनकी मानसिकता बेहद स्त्री-विरोधी है। उनका यह बयान उस समय सोशल मीडिया से लेकर संसद तक चर्चा का विषय बन गया था।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी के बीच हुआ विवाद केवल व्यक्तिगत नहीं था, बल्कि उसने पार्टी के भीतर मौजूद गुटबाजी को भी उजागर कर दिया था।
चुनावी हार के बाद बढ़ी मुश्किलें
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद टीएमसी के भीतर नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि संगठन में बड़े बदलाव की जरूरत है। वहीं कुछ नेता नेतृत्व की कार्यशैली से भी नाराज बताए जा रहे हैं। ऐसे समय में कल्याण बनर्जी की नियुक्ति ने असंतोष को और बढ़ा दिया है। राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पार्टी नेतृत्व जल्द स्थिति को नहीं संभालता तो इसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।
विपक्ष को मिला नया मुद्दा
टीएमसी के भीतर जारी इस घमासान को विपक्षी दल भी मुद्दा बनाने लगे हैं। विपक्ष का आरोप है कि टीएमसी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है और फैसले केवल शीर्ष नेतृत्व की इच्छा से लिए जा रहे हैं। राजनीतिक विरोधियों का कहना है कि महिला सम्मान की बात करने वाली पार्टी अब अपने ही महिला सांसदों की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है। बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं ने भी इस विवाद को लेकर टीएमसी पर निशाना साधा है।

पार्टी में टूट की अटकलें क्यों?
राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा तेज है कि अगर सांसदों की नाराजगी बढ़ती रही तो पार्टी में बड़ा विभाजन देखने को मिल सकता है। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने खुलकर बगावत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन अंदरखाने नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
पार्टी का कहना है कि कुछ सांसद नेतृत्व से सीधे बातचीत कर अपनी चिंता जाहिर कर सकते हैं। वहीं कई नेता चाहते हैं कि पार्टी ऐसे विवादित चेहरों को जिम्मेदारी देने से बचे ताकि संगठन की छवि खराब न हो।
ममता बनर्जी के सामने बड़ी चुनौती
ममता बनर्जी लंबे समय से बंगाल की राजनीति की सबसे मजबूत नेता मानी जाती हैं। लेकिन इस समय उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट रखना है। चुनावी हार, नेताओं की नाराजगी और लगातार बढ़ते विवादों ने टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ममता बनर्जी समय रहते नाराज नेताओं को साथ नहीं ला पाईं, तो पार्टी को भविष्य में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर की राजनीति किस दिशा में जाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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