UP BJP Secret Survey: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज होती नजर आ रही हैं। जिसमें बताया जा रहा है की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तीन स्तरीय गोपनीय सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे का उद्देश्य केवल मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का आकलन करना नहीं है, बल्कि यह भी जानना है कि किन क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति मजबूत है और किन सीटों पर अतिरिक्त मेहनत की जरूरत है।
अधिकारीयों के अनुसार, पार्टी विशेष रूप से उन 61 विधानसभा सीटों पर फोकस कर रही है, जहां पिछले कई चुनावों से जीत नहीं मिल पाई है। वहीं इन सीटों के लिए अलग रणनीति तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिसमें माना जा रहा है कि सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर संगठन, चुनावी अभियान और उम्मीदवारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
तीन स्तरों पर हो रहा है सर्वे
बीजेपी का यह सर्वे तीन अलग-अलग स्तरों पर किया जा रहा है। इसमें सबसे पहले मौजूदा विधायक के कामकाज, जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता और क्षेत्र में उनकी सक्रियता का मूल्यांकन किया जा रहा है।
दूसरे चरण में स्थानीय संगठन, पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से फीडबैक लिया जा रहा है। वहीं तीसरे स्तर पर आम जनता की राय और चुनावी माहौल का आकलन किया जा रहा है। ऐसे में पार्टी का मुख्य उद्देश्य केवल रिपोर्ट तैयार करना नहीं, बल्कि समय रहते कमजोरियों की पहचान कर उन्हें दूर करना भी है।
61 हारी हुई सीटों पर सबसे ज्यादा ध्यान
बीजेपी की रणनीति में सबसे अहम स्थान उन 61 सीटों का है, जहां पार्टी लगातार चुनाव हारती रही है। वहीं माना जा रहा है कि इन सीटों के लिए अलग चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार किया जाएगा।
इन सीटों पर जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे, संगठन की स्थिति और विपक्ष की ताकत जैसे सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन किया जा रहा है। ऐसे में पार्टी का मानना है कि यदि इन सीटों पर बेहतर प्रदर्शन किया जाता है तो 2027 के विधानसभा चुनाव में उसका चुनावी गणित और मजबूत हो सकता है।
पूर्वांचल की 22 सीटें बनी चुनौती
पूर्वी उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती वाले क्षेत्रों में शामिल है। जिनमें आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और मिर्जापुर जैसे जिलों की कुल 22 विधानसभा सीटों पर पार्टी लगातार तीन चुनावों से जीत दर्ज नहीं कर सकी है।
इसी वजह से इन इलाकों में संगठन को मजबूत करने, स्थानीय नेतृत्व को सक्रिय करने और नए सामाजिक समीकरण बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
पश्चिमी यूपी की 13 सीटों पर भी खास नजर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, बिजनौर और मुरादाबाद जैसे जिलों की 13 सीटें भी बीजेपी की प्राथमिकता सूची में शामिल हैं। इन क्षेत्रों में मुस्लिम और दलित मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण चुनावी मुकाबला चुनौतीपूर्ण माना जाता है। पार्टी इन इलाकों में अपनी पहुंच बढ़ाने और नए मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।

अवध और मध्य यूपी की 26 सीटों पर रणनीति
अवध और मध्य उत्तर प्रदेश की रायबरेली, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, बाराबंकी, उन्नाव, हरदोई, फतेहपुर और अंबेडकरनगर जैसे जिलों की 26 सीटें भी बीजेपी के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
इन क्षेत्रों में लंबे समय से विपक्ष का प्रभाव रहा है। ऐसे में पार्टी स्थानीय मुद्दों, संगठनात्मक मजबूती और जनसंपर्क अभियान के जरिए अपनी स्थिति बेहतर बनाने की कोशिश कर रही है।
27 सीटों पर समाजवादी पार्टी से सीधा मुकाबला
जानकारी के लिए बता दें इन 61 सीटों में से 27 ऐसी हैं जहां बीजेपी का सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी (सपा) से होता रहा है। इसी कारण इन सीटों पर चुनावी रणनीति तैयार करते समय विपक्ष की ताकत, बूथ स्तर की स्थिति और पिछले चुनावों के मतदान पैटर्न का भी विस्तार से विश्लेषण किया जा रहा है।
सहयोगी दलों की सीटों का भी हो रहा मूल्यांकन
बीजेपी केवल अपनी सीटों का ही नहीं बल्कि गठबंधन सहयोगियों के प्रदर्शन का भी आकलन कर रही है। अधिकारीयों के अनुसार, निषाद पार्टी, अपना दल (एस), राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के प्रभाव वाले क्षेत्रों की भी समीक्षा की जा रही है। इससे गठबंधन की मजबूती और सीटों के बेहतर तालमेल पर भविष्य में निर्णय लिया जा सकता है।
कार्यकर्ताओं के फीडबैक को मिल रही अहमियत
बीजेपी इस बार केवल नेताओं की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहती। पार्टी कार्यकर्ताओं, बूथ स्तर के पदाधिकारियों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों के सुझावों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है। जिसमें माना जा रहा है कि टिकट वितरण से पहले जमीनी स्तर पर मिलने वाला फीडबैक अहम भूमिका निभा सकता है।
ऑनलाइन परीक्षा से भी परखी गई संगठन की तैयारी
बीजेपी ने चुनावी तैयारी के साथ-साथ संगठन को मजबूत करने के लिए कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा भी आयोजित की है। जिसमें 6 जुलाई से 28 जुलाई तक चले इस अभियान में पार्टी के कई मोर्चों और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। ‘सरल’ एप के माध्यम से आयोजित इस परीक्षा में पार्टी का इतिहास, विचारधारा, संगठनात्मक कार्यप्रणाली, गठबंधन और चुनावी प्रदर्शन से जुड़े प्रश्न पूछे गए।
उत्तर प्रदेश से करीब 5.34 लाख कार्यकर्ताओं ने परीक्षा में भाग लिया, जिनमें लगभग 4.82 लाख सफल रहे। 90 प्रतिशत से अधिक सफलता दर के साथ यूपी के कार्यकर्ताओं ने पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया।
2027 चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की तैयारी
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीजेपी इस बार केवल चुनाव प्रचार पर नहीं बल्कि संगठन की मजबूती, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण और डेटा आधारित चुनावी रणनीति पर भी बराबर ध्यान दे रही है।
गोपनीय सर्वे से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर संगठन में बदलाव, उम्मीदवारों के चयन और चुनावी अभियान की दिशा तय की जा सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस सर्वे को लेकर आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। इसलिए सर्वे से जुड़ी कई बातें फिलहाल राजनीतिक और मीडिया सूत्रों के आधार पर सामने आ रही हैं।
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