Ankit Sharma Murder Case: साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में से एक आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में आज बड़ा दिन है। शुक्रवार, 31 जुलाई को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों की सजा पर फैसला सुनाएगी। अदालत पहले ही इन सभी को हत्या, दंगा, अपहरण और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने समेत कई गंभीर धाराओं में दोषी ठहरा चुकी है। अब फैसला इस बात पर होगा कि दोषियों को मौत की सजा मिलेगी या उम्रकैद। इस मामले पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। यह केवल एक चर्चित हत्या का मामला नहीं है, बल्कि 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुकदमों में से एक माना जाता है।
क्या है पूरा मामला?
फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसी दौरान 26 वर्षीय आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव चांदबाग पुलिया के पास एक नाले से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 51 चोटों के निशान पाए गए, जिनमें कई धारदार हथियारों से किए गए वार शामिल थे। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि अंकित शर्मा पर हिंसक भीड़ ने हमला किया और हत्या के बाद उनका शव नाले में फेंक दिया गया।
किन लोगों को दोषी ठहराया गया?
13 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं, जिनमें हत्या (धारा 302), अपहरण (धारा 365), दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने से जुड़ी धाराएं शामिल हैं, के तहत दोषी माना। हालांकि अदालत ने कुछ अन्य आरोपों, जैसे आपराधिक साजिश, में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर राहत भी दी। मुकदमे में कुल 11 आरोपियों में से 6 को बरी किया गया।
अदालत ने दोषसिद्धि में क्या कहा?
अपने फैसले में अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोप साबित करने में सफल रहा। फैसले में कहा गया कि ताहिर हुसैन उस हथियारबंद भीड़ का हिस्सा थे जिसने हिंसा के दौरान अंकित शर्मा पर हमला किया। अदालत ने यह भी माना कि भीड़ के सदस्यों को यह जानकारी थी कि उनके कृत्यों से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है।
अभियोजन पक्ष ने क्यों मांगी फांसी?
सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस और विशेष लोक अभियोजक ने अदालत से दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की। अभियोजन पक्ष ने कहा कि यह हत्या बेहद क्रूर, योजनाबद्ध और अमानवीय थी। अदालत में दलील दी गई कि अंकित शर्मा के शरीर पर 51 घाव मिले थे, जिनमें 16 से अधिक धारदार हथियारों से किए गए थे। अभियोजन का कहना है कि यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में आता है, इसलिए दोषियों को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने अदालत से मृत्युदंड न देने की अपील की। वकीलों का कहना था कि मुकदमे के दौरान 91 गवाहों के बयान दर्ज किए गए और अंततः 11 में से 6 आरोपियों को बरी कर दिया गया। उनके अनुसार यह मामला “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता। बचाव पक्ष ने अदालत से सुधार की संभावना को ध्यान में रखते हुए कम सजा देने की अपील की और कहा कि मृत्युदंड अंतिम विकल्प होना चाहिए।
सजा पर फैसला क्यों अहम है?
भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी आरोपी को दोषी ठहराने और उसकी सजा तय करने की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। पहले अदालत यह तय करती है कि आरोपी दोषी है या नहीं। इसके बाद दोनों पक्ष सजा के संबंध में अपनी-अपनी दलीलें रखते हैं। इन्हीं दलीलों को सुनने के बाद अदालत यह तय करती है कि दोषी को फांसी, उम्रकैद या कानून के अनुसार कोई अन्य सजा दी जाए। इसी प्रक्रिया के तहत अदालत ने पहले दोषसिद्धि का फैसला सुनाया और अब सजा पर अपना निर्णय सुनाएगी।
जांच में क्या-क्या सामने आया?
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वीडियो फुटेज, फोरेंसिक सामग्री और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अदालत के सामने पेश किए। अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि इन सभी साक्ष्यों ने यह साबित किया कि अंकित शर्मा की हत्या हिंसक भीड़ ने की थी। वहीं बचाव पक्ष ने कई साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, लेकिन अदालत ने उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर पांच आरोपियों को दोषी माना।
2020 दिल्ली दंगों का सबसे चर्चित मामला
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर विरोध और समर्थन के बीच उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़क गई थी। इन दंगों में कई लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में संपत्ति को नुकसान पहुंचा। अंकित शर्मा हत्याकांड इस हिंसा से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा। इस मुकदमे की सुनवाई करीब छह वर्षों तक चली, जिसके बाद अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
आज के फैसले पर सबकी नजर
आज कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यदि अदालत इसे “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानती है तो दोषियों को मृत्युदंड दिया जा सकता है। वहीं यदि अदालत को लगता है कि यह मामला उस श्रेणी में नहीं आता, तो दोषियों को उम्रकैद या कानून के तहत अन्य सजा सुनाई जा सकती है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जो भी फैसला आएगा, उसके खिलाफ ऊपरी अदालतों में अपील का रास्ता खुला रहेगा।
Read Related News: अजिंक्य रहाणे ने इंटरनेशनल क्रिकेट को कहा अलविदा, शेयर किया भावुक वीडियो



